अंबरनाथ में भाजपा का ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा सवालों के घेरे में है. वजह- अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने अपने सहयोगी शिवसेना शिंदे गुट को दरकिनार करते हुए कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया है. इस सियासी समीकरण ने महायुती के भीतर खासकर शिंदे गुट के अंदर हलचल तेज कर दी है.
हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में महायुती को राज्यभर में बड़ी सफलता मिली है. कई जगह भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए. इसी बीच बीएमसी सहित 29 महानगर पालिका के चुनावों की सरगर्मी भी बढ़ती जा रही है. लेकिन अंबरनाथ नगर परिषद में जो सियासी तस्वीर सामने आई हैं, उसने सभी को चौंका दिया है.
अंबरनाथ और बदलापुर नगर परिषद चुनावों में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. दोनों ही जगह भाजपा के नगराध्यक्ष चुने गए. बदलापुर में भाजपा की जीत अपेक्षित मानी जा रही थी, लेकिन अंबरनाथ का नतीजा पूरी तरह चौंकाने वाला रहा.
अंबरनाथ में भाजपा की नगराध्यक्षा तेजश्री करंजुले ने शिवसेना शिंदे गुट की उम्मीदवार मनीषा वालेकर को करारी शिकस्त दी. चुनाव के बाद सत्ता के समीकरण ऐसे बदले कि राजनीतिक हलकों में हैरानी फैल गई. शिवसेना शिंदे गुट के विधायक बालाजी किणीकर ने भाजपा से पारंपरिक गठबंधन बनाए रखने की भरपूर कोशिश की, लेकिन उनके प्रयास नाकाम रहे.
अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा के 15, कांग्रेस के 12 और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस के 4 सदस्यों ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा पूरा कर लिया. इस गठजोड़ से शिवसेना शिंदे गुट को बड़ा झटका लगा, जबकि उनके 28 नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं.
बालाजी किणीकर, विधायक, शिवसेना (शिंदे गुट) ने कहा कि अंबरनाथ में पारंपरिक युति होनी चाहिए थी. इसको लेकर राज्य स्तर पर भी बातचीत हुई थी. भाजपा का ‘कांग्रेस मुक्त’ का नारा यहां आकर खोखला साबित हुआ है. सत्ता के लिए स्थानीय भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के साथ गलत गठबंधन किया है. इससे आने वाले महानगर पालिका चुनावों में गलत संदेश गया है. भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. भाजपा नेता गुलाबराव करंजुले का कहना है कि पार्टी ने जनता से जो वादा किया था, उसी को निभाने के लिए यह फैसला लिया गया है.
गुलाबराव करंजुले, भाजपा नेता ने कहा कि ‘हमने जनता से वादा किया था कि अंबरनाथ को भयमुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त बनाएंगे. जनता के सम्मान में हमने यह गठबंधन किया है. शिवसेना के दो नगराध्यक्ष भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं. अब आगे और कितने लोग जाएंगे, यह सवाल है.’
कुल मिलाकर अंबरनाथ में भाजपा-कांग्रेस की यह सियासी नजदीकी महायुती के भीतर तनाव बढ़ा रही है. अब देखना होगा कि इसका असर आगामी नगर निगम चुनावों पर किस तरह पड़ता है.
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