महाराष्ट्र के नासिक जिले में इगतपुरी रेलवे स्टेशन पर 10 सितंबर को लावारिस मिला पांच साल का बच्चा करीब एक महीने बाद अपने परिवार से मिल गया. बच्चे को फल बेचने वाली एक महिला ने देखा था, जिसके बाद उसने पुलिस को इसकी जानकारी दी. नासिक रोड रेलवे पुलिस ने बाल कल्याण समिति के आदेश पर बच्चे को शेल्टर होम भेज दिया था. बच्चे का नाम अमेय रखा गया था.
किसी से बात नहीं करता था बच्चा
शेल्टर होम पहुंचने के बाद अमेय डरा हुआ था. वह शुरुआती चार दिनों तक किसी से बात नहीं कर रहा था. इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता प्रणाली पिंगले पाटील ने बच्चे से मां जैसा रिश्ता बनाया और धीरे-धीरे उससे बातचीत शुरू की. उनके प्यार और सब्र से बच्चे का डर कम होने लगा और वह घुल-मिलकर बात करने लगा.
गांव की तस्वीर देखकर पहचाना घर
बातचीत के दौरान अमेय ने मध्य प्रदेश के एक गांव का नाम बताया. इसके बाद प्रणाली ने गूगल की मदद से उस गांव और आसपास के सैकड़ों गांवों की फोटो दिखाईं. तस्वीरें देखते हुए बच्चा सिर हिलाकर हां या ना में जवाब देता रहा. एक गांव की फोटो देखकर उसके चेहरे पर खुशी दिखाई दी. इससे उसके परिवार और घर का पता लगाने में मदद मिली. इसके बाद इगतपुरी रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी लिए गए. रेलवे पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस से संपर्क किया. आखिरकार मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से अमेय का बड़ा भाई नासिक पहुंचा और उसे अपने साथ घर ले गया.
प्यार और भरोसे से परिवार तक पहुंचा अमेय
प्रणाली ने बताया कि बच्चों का भरोसा जीतना सबसे जरूरी होता है. वह अमेय पर किसी तरह का दबाव नहीं डालती थी, बल्कि प्यार से बात करती थीं. फोटो की मदद से बच्चे को अपना गांव पहचानने में मदद मिली. पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं की कोशिशों से उसका परिवार मिल सका. प्रणाली अब तक 10 बिछड़े हुए बच्चों को उनके माता-पिता से मिलवा चुकी हैं.