मध्यप्रदेश में 12 नवंबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में नया मोड़ आ गया है. भोपाल के रहने वाले राजकुमार लोहानी ने सोमवार को भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया. 68 साल के राजकुमार लोहानी भोपाल के पुराने शहर के घोरा नक्कस इलाके में रहते हैं. उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है और मोबाइल उपकरणों की दुकान चलाते हैं. उन्होंने नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख पर अपना पर्चा जमा किया.
कांग्रेस ने लोहानी को समर्थन देने का ऐलान किया
कांग्रेस पुरी की उम्मीदवारी का विरोध कर रही है. पार्टी के एक नेता ने कहा कि कांग्रेस विधायक स्वतंत्र उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का समर्थन करेंगे. मध्यप्रदेश विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे भी लोहानी के समर्थन करने वालों में शामिल हैं. जब लोहानी ने चुनाव अधिकारी को अपना नामांकन सौंपा, तब कांग्रेस के छह विधायक भी वहां मौजूद थे.
हीरालाल अलावा ने क्या कहा?
कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उनकी पार्टी के 10 विधायकों ने राजकुमार लोहानी को समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती कि जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर चर्चा में रहे हरदीप सिंह पुरी मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचें. अलावा ने कहा कि मध्यप्रदेश के लोग एपस्टीन और पुरी के बीच बताए जा रहे संबंधों के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं. उनके मुताबिक, कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर भाजपा और उससे जुड़े लोगों की भूमिका सामने लाना चाहती है.
पुरी ने आरोपों को खारिज किया
विपक्ष ने जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर हरदीप सिंह पुरी पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, पुरी इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं. वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि राजकुमार लोहानी का नामांकन जांच के दौरान खारिज हो सकता है. इसकी वजह यह है कि उन्होंने जरूरी हलफनामा जमा नहीं किया है. तेलंगाना के कांथे सयाण्णा ने भी स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरा है. अधिकारी के मुताबिक, उनके नामांकन में जरूरी समर्थन करने वालों की संख्या पूरी नहीं है. इसलिए उनका पर्चा भी खारिज हो सकता है.
मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था. यह सीट केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. मुरुगन का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था.
जीत के लिए 116 वोट जरूरी
मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं. भाजपा के पास बहुमत है, जबकि कांग्रेस के पास अकेले इस सीट को जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं. चुनाव के तय फॉर्मूले के मुताबिक, राज्यसभा की यह सीट जीतने के लिए 116 वोटों की जरूरत है. कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा अदालत के आदेश के कारण इस चुनाव में वोट नहीं डाल सकते. इससे मतदान करने वाले विधायकों की संख्या पर असर पड़ा है.
निर्मला सप्रे के वोट पर भी नजर
बीना से विधायक निर्मला सप्रे की वोटिंग को लेकर भी चर्चा है. वह आधिकारिक तौर पर खुद को कांग्रेस के साथ बताती हैं, लेकिन उन्हें कई बार भाजपा के कार्यक्रमों में भी देखा गया है. उनके खिलाफ दलबदल से जुड़ा मामला अभी लंबित है. ऐसे में राज्यसभा उपचुनाव में उनके वोट को लेकर स्थिति साफ नहीं है.