मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस की जांच में एक हेड कांस्टेबल, उसके परिवार, करीबियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर कई संपत्तियों का पता चला है. इन संपत्तियों की मौजूदा कीमत करीब 65.72 करोड़ रुपये बताई गई है. पुलिस के मुताबिक, अब तक सिर्फ 50 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है.
लोकायुक्त पुलिस के डीएसपी सुनील तालान ने बताया कि इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में चालक के पद पर तैनात हेड कांस्टेबल फिरोज खान के खिलाफ शिकायत मिली थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वह लंबे समय से ड्यूटी से गैरहाजिर है और पुलिसकर्मी होने का रौब दिखाकर विवादित संपत्तियों की खरीद-बिक्री में शामिल है. शिकायत की जांच के बाद फिरोज खान और उनकी करीबी सहयोगी रोशनी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकने वाले कानून के तहत मामला दर्ज किया गया.
इंदौर और देवास में हुई छापेमारी
लोकायुक्त पुलिस ने 14 अक्टूबर को इंदौर और देवास में फिरोज खान, उनके परिवार, करीबियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के ठिकानों पर छापे मारे. इसके बाद जांच में कुछ और संपत्तियों की जानकारी मिली. डीएसपी सुनील तालान के अनुसार, अब तक सामने आई 50 संपत्तियों में मकान, कृषि भूमि और आवासीय और कमर्शियल प्लॉट शामिल हैं. सरकारी रेट के हिसाब से इनकी कुल कीमत करीब 18.29 करोड़ रुपये है, जबकि मौजूदा बाजार भाव के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत 65.72 करोड़ रुपये बताई गई है. जांच के दौरान देवास की एक कॉलोनी में दो और प्लॉट का पता चला है.
इनकी बाजार कीमत करीब 60.54 लाख रुपये आंकी गई है. इसके अलावा, देवास जिले के पिपलरावां में फिरोज खान की मां वहीदा खान के नाम पर खरीदी गई आरा मशीन की जानकारी भी सामने आई है. इसे छह लाख रुपये में खरीदा गया था.
वेतन से हुई कमाई भी जांच के दायरे में
पुलिस के मुताबिक, फिरोज खान ने पुलिस विभाग में 24 साल की नौकरी के दौरान वेतन से करीब 75 लाख रुपये कमाए. कमाई के दूसरे रास्तों से हुई इनकम को जोड़ने पर उनकी कुल कानूनी आय लगभग 1.94 करोड़ रुपये पाई गई है. लोकायुक्त पुलिस अब हेड कांस्टेबल, उनके परिवार और करीबियों की संपत्तियों की विस्तृत जांच कर रही है.