मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्कूली वाहनों में बच्चों को क्षमता से ज्यादा बैठाने के मामलों पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने प्रशासन की ओर से पेश की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि केवल कागजों पर कार्रवाई दिखाने से काम नहीं चलेगा. अधिकारियों को सड़कों पर भी इसका असर दिखाना होगा. कोर्ट ने कहा कि सभी जानते हैं कि स्कूली वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भरा जा रहा है. ऐसे में प्रशासन को सिर्फ रिपोर्ट देने के बजाय मौके पर कार्रवाई करनी चाहिए.
अधिकारियों को कोर्ट की चेतावनी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि साल 2017 में प्रशासन को नियमित रूप से कार्रवाई की रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया था. लेकिन साल 2019 के बाद से कोर्ट में कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई. इस पर अदालत ने नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को उनके काम की याद दिलाना अदालत की जिम्मेदारी नहीं है.
यदि जिम्मेदार अधिकारी नियमों का पालन कराने और कार्रवाई जारी रखने का हलफनामा पेश नहीं करते हैं, तो इसे अदालत की अवमानना माना जा सकता है. यह सुनवाई अवधेश सिंह भदौरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका पर हुई. कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपने लिखित सुझाव पेश करने के निर्देश भी दिए हैं.
190 चालकों के लाइसेंस निलंबित, 87 वाहनों के चालान
सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और पुलिस प्रशासन ने मिलकर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट के मुताबिक, नियम तोड़ने वाले 190 चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए हैं. इसके अलावा परिवहन विभाग और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 87 वाहनों के चालान काटे. इन वाहनों में क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठाए जा रहे थे. कुछ वाहन बिना परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और बीमा के चल रहे थे.
प्रशासन ने बताया कि इस अभियान से पहले भी 83 और 38 वाहनों के चालान काटे गए थे. वहीं, शहर के चारों ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों को सख्त निर्देश दिए गए हैं. उनसे कहा गया है कि जिस ऑटो या वाहन में अतिरिक्त सीट या फट्टी लगी मिले, उसे फिटनेस प्रमाणपत्र न दिया जाए. नियम तोड़ने वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा रहा है.
पुलिस अधिकारी ने कोर्ट को दिया भरोसा
सुनवाई के दौरान ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक भी अदालत में मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में पद संभाला है. इसलिए उन्होंने अगली सुनवाई तक का समय मांगा. पुलिस अधिकारी ने कोर्ट को भरोसा दिया कि वे खुद पूरी व्यवस्था पर नजर रखेंगे. साथ ही, अगली सुनवाई तक जमीन पर सुधार करके दिखाएंगे.
ग्वालियर के अलावा 9 जिलों में भी खराब हालात
याचिकाकर्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने अदालत को बताया कि स्कूली वाहनों में बच्चों को क्षमता से ज्यादा बैठाने की समस्या सिर्फ ग्वालियर तक सीमित नहीं है. संभाग के दूसरे नौ जिलों में भी हालात खराब हैं. उन्होंने कहा कि इन जिलों में स्कूली वाहनों की जांच और प्रशासन की निगरानी बहुत कम है. ऐसे में वहां भी सख्त कार्रवाई की जरूरत है.