मध्य प्रदेश में दूषित पानी के चलते करीब 5 की मौत और 40 से अधिक लोगों के बीमार होने के बाद से देशभर में हड़कंप मचा हुआ है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं, साथ ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इसी दिशा में राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अधिकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है. शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम मोहन ने कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई.
पानी लाइन की मरम्मत जारी
वहीं, प्राप्त जानकारी के मुताबिक इंदौर के भगीरथपुरा में जहां से दूषित पानी लाइन में मिला था उससे अब ठीक कर के बंद कर दिया गया है और क्षेत्र में सभी जहां लीकेज चेक करने का काम जारी है. भगीरथपुरा क्षेत्र के लोगों को नल से आने वाले पानी के इस्तेमाल से रोका गया है. लोगों से कहा गया है कि पानी को पीने के लिए यूज नहीं करना है. इस बीच दूषित पानी के खिलाफ लोगों का आक्रोश खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. शुक्रवार को महिलाएं पानी की टंकी पर पहुंच गईं और आयुक्त-अप्रयुक्त मुर्दाबाद के पोस्टर दिखाए गए.
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इन अधिकारियों पर गिरी गाज
दूषित पानी मामले में जिन अधिकारियों पर गाज गिरी है, उनमें इंदौर नगर निगम के आयुक्त- अपर आयुक्त और इंजीनियर शामिल है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीएम मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त को हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने का निर्देश दिया है. रिक्त हुए इन पदों पर तत्काल प्रभाव से नए अधिकारियों की नियुक्ति के भी निर्देश दिए गए हैं. जबकि नगर निगम आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.