झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के वकीलों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए मेडिकल इंश्योरेंस से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया है. अदालत ने राज्य सरकार के उस आधिकारिक आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया है, जिसमें सरकार ने पंजीकृत वकीलों के स्वास्थ्य बीमा के लिए ₹6000 का सालाना प्रीमियम खुद वहन करने की बात कही है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वित्तीय सहायता केवल एक वर्ष के लिए सीमित नहीं है, बल्कि इसे आगे भी लगातार जारी रखा जाएगा.
प्रैक्टिसिंग वकील ने दायर की थी याचिका
यह फैसला चीफ जस्टिस एमएस सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड के ही एक प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि जरूरतमंद वकीलों और उनके आश्रितों के लिए आर्थिक मदद सुनिश्चित की जाए और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाकर वकीलों को भी इसमें शामिल किया जाए.
अदालत ने सरकार को दिया था ये निर्देश
इससे पहले, 10 जुलाई 2024 को मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले वकीलों के कल्याण और उनकी जीवन रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार को जीवन बीमा और मेडिकल लाभ देने की दिशा में ठोस गाइडलाइन तैयार करनी चाहिए.
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सरकार ने कोर्ट को दी जानकारी
इसी क्रम में, ताजा सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वकीलों के स्वास्थ्य कल्याण के लिए पहले ही प्रभावी कदम उठाए जा चुके हैं. सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग ने 24 जनवरी 2025 को एक प्रस्ताव पारित किया है. इसके तहत प्रत्येक पंजीकृत अधिवक्ता के लिए ₹6000 की वार्षिक प्रीमियम राशि राज्य सरकार देगी. इसके लिए ‘नॉन-सैलरी हेड’ के तहत आवश्यक बजट का आवंटन भी कर दिया गया है.
राज्य सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया गया कि गजट में प्रकाशन न होने से योजना के क्रियान्वयन में कोई रुकावट नहीं आएगी और प्रीमियम की अपडेटेड राशि समय-समय पर ‘झारखंड एडवोकेट्स वेलफेयर ट्रस्टी कमेटी’ को हस्तांतरित कर दी जाएगी.
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जनहित याचिका की मांगे लगभग पूरी
अदालत ने सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे और बयानों को एक औपचारिक आश्वासन के रूप में स्वीकार किया. खंडपीठ ने माना कि जनहित याचिका में जो राहत मांगी गई थी, वह काफी हद तक पूरी हो चुकी है. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगर भविष्य में तकनीकी रूप से इस प्रस्ताव को आधिकारिक गजट में प्रकाशित करना अनिवार्य पाया जाता है, तो राज्य सरकार उचित समय के भीतर आवश्यक कदम उठाएगी.
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