2027 के हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर सियासी लड़ाई पहले तेज हो गई है. उनकी पत्नी और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से कहा है कि उनके नाम का इस्तेमाल करने वाले प्रस्तावित राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन को मंजूरी से पहले उनका पक्ष भी जाना जाए.
EC से क्या की मांग?
प्रतिभा सिंह ने 7 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त को खत लिखा है. खत में प्रतिभा सिंह ने ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ जैसे प्रस्तावित दलों के बारे में आई खबरों पर आपत्ति जताई. उन्होंने ‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ जैसे नामों के इस्तेमाल का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये नाम वीरभद्र सिंह और उनकी विरासत से जुड़े हैं.
प्रतिभा सिंह का कहना है कि वह किसी के भी राजनीतिक पार्टी बनाने के अधिकार का विरोध नहीं करतीं, लेकिन उन्होंने परिवार की मंजूरी के बिना अपने दिवंगत पति के नाम और साख के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने चुनाव आयोग से साफ तौर पर कहा है कि ना तो उन्होंने और ना ही वीरभद्र सिंह के परिवार के किसी सदस्य ने उनके नाम का इस्तेमाल करके कोई राजनीतिक संगठन बनाने की मंजूरी दी है. उन्होंने यह भी मांग की है कि चुनाव आयोग ऐसी किसी भी अर्जी पर कोई फैसला लेने से पहले उनका पक्ष भी सुने.
क्यों हुआ ये बवाल
हाल ही कांग्रेस के सीनियर नेता युद्धवीर सिंह बैंस ने कहा था कि वह वीरभद्र के नाम पर एक नई सियासी पार्टी बनाना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने 2027 का विधानसभा चुनाव उसी पार्टी के नाम से लड़ने की भी चाहत बताई. बैंस मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के खिलाफ बोलते रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस सरकार के कामकाज को लेकर भी कई बार आवाज उठाई है.