हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में दो समुदायों के बीच विवाद के बाद तनाव का माहौल है. इसे देखते हुए प्रशासन ने कस्बे के कुछ हिस्सों में 29 अक्टूबर तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला दोबारा हिंसा होने की आशंका को देखते हुए लिया गया है. सिरमौर की जिलाधिकारी प्रियंका वर्मा ने सोमवार देर रात इस संबंध में आदेश जारी किया. प्रशासन को आशंका थी कि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब से सिख और वाल्मीकि समुदायों के लोग अपने-अपने समुदाय के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए वाल्मीकि चौक पहुंच सकते हैं.
स्वागत द्वार लगाने को लेकर हुआ था विवाद
यह विवाद 23 अक्टूबर को नाहन के वाल्मीकि चौक पर स्वागत द्वार लगाने को लेकर शुरू हुआ था. इसके बाद दोनों समुदायों के लोगों के बीच झड़प हो गई. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर ईंटें, पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं. इस घटना में पुलिसकर्मियों सहित 14 लोग घायल हो गए. सरकारी और अन्य वाहनों को भी नुकसान पहुंचा. घायलों में नाहन सदर थाने के प्रभारी कुलबीर सिंह और दो अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल हैं.
पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक
प्रशासन के आदेश के अनुसार, निषेधाज्ञा लागू रहने तक पांच या उससे ज्यादा लोग एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकेंगे. रैलियां, जुलूस, प्रदर्शन और हड़ताल करने पर भी रोक लगाई गई है. इसके अलावा घातक हथियार रखने, सार्वजनिक जगहों पर ज्वलनशील सामान ले जाने, पत्थर या आपत्तिजनक चीजें फेंकने और भड़काऊ भाषण देने पर भी प्रतिबंध रहेगा. प्रशासन का कहना है कि पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति पर काबू पा लिया गया था, लेकिन इलाके में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है.
शांति समझौते के बाद भी सतर्क प्रशासन
इससे पहले शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दोनों समुदायों के लोगों की बैठक हुई थी. बैठक में दोनों पक्षों ने शांति बनाए रखने और आगे विवाद नहीं करने पर सहमति जताई थी. इसके बाद वाल्मीकि जयंती का जुलूस गोविंदगढ़ इलाके से निकला था. इस दौरान सिख समुदाय के लोगों ने जुलूस का स्वागत भी किया था. अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल दोनों समुदायों के बीच कोई बड़ा तनाव नहीं है. हालांकि, उन्हें आशंका है कि बाहर से आने वाले लोगों के हस्तक्षेप से स्थिति फिर बिगड़ सकती है. मंगलवार को वाल्मीकि चौक पर हुई तोड़फोड़ के विरोध में कुछ लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है.