हर साल की तरह इस साल भी मानसून की बारिश में गुरुग्राम एक बार फिर डूब गया है। सोमवार दोपहर से हो रही बारिश के चलते गुरुग्राम की सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं। गाड़ियां रेंगती हुई आगे बढ़ रही हैं। कई इलाकों में भीषण जाम लगा हुआ है। इस समस्या से 30 लाख लोग हर साल परेशान रहते हैं। आखिर ये गुरुग्राम में हर साल क्यों होता है? इसके पीछे ड्रेनेज सिस्टम के अलावा कई वजह बताई जा रही हैं।
गुरुग्राम में सोमवार को भारी बारिश की वजह कई हाइवे और अंदरूनी सड़कों पर 10 से 20 किलोमीटर का लंबा जाम लग गया। सड़कों पर पानी भरा होने के चलते कई गाड़ियां खराब हो गईं। लोग घंटों जाम में फंसे रहे। जिसका फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके अलावा भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई और घरों में पानी घुस गया। आखिर क्या वजह है जो गुरुग्राम हर साल बारिश के पानी में डूब जाता है। सरकार हर साल कहती है कि इस मानसून कही भी जलभराव नहीं होगा, लेकिन बारिश उनके काम की पोल खोलकर रख देती है।
क्यों हर साल बारिश में डूब जाता है गुरुग्राम?
बताया जाता है कि जुलाई 2016 में गुरुग्राम में महाजाम लगा था। दरअसल लोग शाम के समय ऑफिस से घर के लिए निकले, लेकिन आधी रात तक घर नहीं पहुंचे। सैकड़ों लोग जाम में फंसे रहे। इसके बाद सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे। इसके अलावा शहर में कई जगह अंडरपास और फ्लाइओवर का भी निर्माण कराया। इसके बाद भी हर मानसून की बारिश में गुरुग्राम डूब जाता है।
13 साल बाद भी ड्रेनेज सिस्टम का काम अधूरा
एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि गुरुग्राम में 26 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज का निर्माण 2010 में शुरू किया गया था। उस समय पर इस पर 294 करोड़ रुपये का खर्च किए जाने थे। कुछ समय बाद इसका बजट 400 करोड़ रुपये कर दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि आज तक इसका काम पूरा नहीं हो पाया है। 13 साल बाद भी 3 किलोमीटर ड्रेनेज निर्माण का काम अभी भी बाकी है।
अरावली की पहाड़ियों से घिरा है गुरुग्राम
दरअसल गुरुग्राम अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। बताते हैं कि बारिश में इन्हीं पहाड़ियों का पानी गिरता हुआ शहर में पहुंचता है। जिससे शहर का सीवेज सिस्टम जाम हो जाता है। असल में शहर में उपयोग होने वाला पानी भी नाले में गिरता है। मानसून में नाले में गिरने वाली पानी की मात्रा कई गुणा अधिक हो जाती है। सीवेज सिस्टम पानी का दबाव नहीं झेल पाता है और वो सड़क पर आ जाता है। इसी वजह से हर साल गुरुग्राम बारिश के पानी में डूब जाता है।
अंग्रेजों के जमाने में नहीं डूबता था गुरुग्राम
जानकार बताते हैं कि गुरुग्राम में अंग्रेजों के जमाने के पुराने घाट, तलाब, झीलें, कुल पुरानी जल निकासी वाली नाले और छोटे-बड़े कई बांध बनाए गए थे। उस समय पहाड़ों से आने वाला बारिश का इन जगहों पर जाकर जमा हो जाता था। धीरे-धीरे शहरीकरण होने से गुरुग्राम का पूरा ढांचा बदल गया।
तालाब, झीलें और जल निकासी की सभी प्रणालियां गायब
शहरीकरण होने पर सभी तालाब, झीलें और जल निकासी की सभी प्रणालियां गायब हो गई हैं। अब बारिश में यह पानी बाहर नहीं निकल पाता है और शहर में जगह-जगह जमा हो जाता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इसके अलावा निजी डेवलपर्स ने भी शहर की भुगोल स्थिति को जाने बिना ही कई सोसायटियों का निर्माण कराया है, जो बरसात में जलभराव का कारण बनते हैं।
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