बचपन से सुन नहीं सकते हरियाणा के प्रदीप, 5,364 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर पूरा किया सपना

हरियाणा के बैंक मैनेजर प्रदीप मुंडेजा बचपन से सुन नहीं सकते. उन्होंने 130 किलोमीटर की कठिन ट्रेकिंग पूरी कर 5,364 मीटर ऊंचे एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का सपना पूरा किया.

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हरियाणा के प्रदीप मुंडेजा ने बचपन से सुनने में असमर्थ होने के बावजूद 130 किलोमीटर की कठिन ट्रेकिंग पूरी कर एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का सपना पूरा किया (Photo- LinkedIn/PradeepMundeja)

हरियाणा के प्रदीप मुंडेजा ने ऐसा काम किया है, जो कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है. वह 7 साल की उम्र से पूरी तरह सुन नहीं सकते. इसके बावजूद उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचने का कठिन सफर पूरा किया. 13 अक्टूबर को उन्होंने अपना सालों पुराना सपना पूरा कर लिया. प्रदीप ने हिमालय के मुश्किल रास्तों पर करीब 130 किलोमीटर की ट्रेकिंग की. एवरेस्ट बेस कैंप समुद्र तल से 5,364 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां हवा में ऑक्सीजन कम होती है और ठंड भी बहुत ज्यादा पड़ती है. ऐसे में हर कदम चलना मुश्किल हो जाता है.

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प्रदीप हरियाणा के रहने वाले हैं और करनाल में पंजाब नेशनल बैंक के सर्किल ऑफिस में चीफ मैनेजर के पद पर काम करते हैं. एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने की उनकी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इस सफर के लिए उन्होंने कई महीनों तक तैयारी की. उन्होंने अपनी सेहत पर ध्यान दिया और शरीर को कठिन चढ़ाई के लिए तैयार किया. इस ट्रेक के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कहीं खड़ी चढ़ाई थी, तो कहीं रास्ता पथरीला था. कड़ाके की ठंड, कम ऑक्सीजन और अचानक बदलता मौसम भी बड़ी चुनौती थे. लेकिन प्रदीप ने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते रहे.

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प्रदीप के लिए यह सफर सिर्फ एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने के बारे में नहीं था. यह उनके लिए अपने सपने को पूरा करने और खुद पर भरोसा बनाए रखने का भी अनुभव था. उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी यात्रा के बारे में लिखा कि यह उनका लंबे समय से देखा हुआ सपना था. इसे पूरा करने के लिए अनुशासन, मेहनत और लगातार आगे बढ़ते रहने की जरूरत थी. प्रदीप ने लिखा, ‘मैं 7 साल की उम्र से पूरी तरह सुन नहीं सकता. जिंदगी में मैंने सीखा है कि मुश्किलें हमारे सफर का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन उन्हें यह तय नहीं करने देना चाहिए कि हम कहां तक पहुंच सकते हैं.’

उन्होंने बताया कि पहाड़ों ने सभी यात्रियों की परीक्षा ली. लंबे समय तक पैदल चलना, खड़ी चढ़ाई चढ़ना, बर्फ और तेज ठंड का सामना करना आसान नहीं था. लेकिन इस सफर ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. उन्होंने विनम्रता, साथियों का साथ और मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद करने का महत्व भी समझा.

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प्रदीप ने अपने साथ ट्रेकिंग करने वाले साथियों का भी धन्यवाद किया. उन्होंने अपने ‘फैंटास्टिक फाइव’ साथियों की दोस्ती और सहयोग को इस सफर का खास हिस्सा बताया. उनके मुताबिक, इस यात्रा की यादें लंबे समय तक उनके साथ रहेंगी. प्रदीप की कहानी बताती है कि जीवन में मुश्किलें आने के बाद भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना जरूरी है. मेहनत, तैयारी और मजबूत इरादे से इंसान अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.

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