मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के पहले ही दिन आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया. बुधवार रात से शुरू हुए बिजली कट ने शहर के बड़े हिस्से में अंधेरा फैला दिया. बिजली न होने की वजह से घरों में इन्वर्टर जवाब दे गए, पानी की सप्लाई ठप हो गई और वाई-फाई बंद होने से वर्क फ्रॉम होम करने वाले पेशेवरों का काम ठप पड़ गया. हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में कर्मचारी सड़कों पर हैं. ‘ऑल इंडिया पावर कॉरपोरेशन’ और कर्मचारी यूनियनों के आह्वान पर बिजली कर्मी 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल पर चले गए हैं.
सेक्टरों में मचा हाहाकार, पानी को तरसे लोग
सेक्टर 5, 7, पालम विहार और डीएलएफ फेज 2 समेत कई प्रमुख इलाकों में रात 10 बजे से बिजली गायब रही. पालम विहार मास्टर लाइन में आई तकनीकी खराबी को हड़ताल के चलते सुधारा नहीं जा सका. सेक्टर 5 आरडब्ल्यूए के अनुसार, बिजली न होने से बूस्टिंग स्टेशन नहीं चले, जिससे छतों पर टंकियां खाली रह गईं और बच्चे स्कूल तक नहीं जा सके. द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसायटियों को जेनरेटर चलाने के लिए अतिरिक्त डीजल का सहारा लेना पड़ रहा है.
प्रशासन अलर्ट, जारी किए हेल्पलाइन नंबर
हालात बिगड़ते देख गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह ने बिजली अधिकारियों के साथ आपात बैठक की. उन्होंने अस्पताल, पेयजल पंप और मेट्रो जैसी जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए. बिजली संकट की शिकायतों के लिए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने हेल्पलाइन नंबर 1912, 180010804334 और व्हाट्सएप नंबर 8813999708, 9540954768 जारी किए हैं.
कर्मचारियों के साथ खड़ी सरकार, जाएगी अपीलेट ट्रिब्यूनल
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है. सरकार ने स्पष्ट किया कि वह निजीकरण के पक्ष में नहीं है और नियामक आयोग के इस आदेश के खिलाफ 5-6 दिनों में बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में याचिका दायर करेगी. जरूरत पड़ने पर सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगी.