सांस्कृतिक संस्था ‘सोपान’ के मंच ‘ऐक्यम’ (AIKYAM) के दूसरे संस्करण ‘रस एंड रियलिज्म’ ने वडोदरा में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विरासत को एक नए रूप में पेश किया. इस खास आयोजन में कला, इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का खूबसूरत मेल देखने को मिला. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वडोदरा की समृद्ध कलात्मक विरासत के जरिए भारतीय और यूरोपीय परंपराओं के साझा इतिहास को सामने लाना रहा. इस 2026 संस्करण को गुजरात पर्यटन, वडोदरा सांसद डॉ. हेमांग जोशी, डॉ. राधिकराजे गायकवाड़, ‘इंक्रेडिबल इंडिया’, वडोदरा नगर निगम, बड़ौदा हेरिटेज ट्रस्ट और FGI का मजबूत सहयोग मिला. वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिनिधिमंडल और 10 यूरोपीय दूतावासों ने भी इसमें अपनी सहभागिता निभाई.
कला और उसके संरक्षण पर मंथन
कार्यक्रम की शुरुआत एफजीआई ऑडिटोरियम में ‘कन्वर्सेशन्स ऑन आर्ट इन वडोदरा’ सत्र से हुई. इसमें महारानी डॉ. राधिकराजे गायकवाड़ और अंतरराष्ट्रीय कला विशेषज्ञ डेबोरा स्वैलॉ ने अपने विचार रखे. डॉ. राधिकराजे ने वडोदरा के सांस्कृतिक स्वरूप और लक्ष्मी विलास पैलेस के दुर्लभ कला संग्रह पर रोशनी डाली. वहीं, डेबोरा स्वैलॉ ने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पुरानी कलाकृतियों का संरक्षण और जीर्णोद्धार बेहद जरूरी है.
हेरिटेज वॉक और राजा रवि वर्मा की कलाकृतियां
उद्घाटन सत्र के बाद अतिथियों को सिटी टूर कराया गया. इस दौरान सभी ने महाराजा फतेहसिंह म्यूजियम का दौरा किया और वहां मौजूद प्रख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा की ऐतिहासिक कृतियों को करीब से देखा. सूर सागर झील के आसपास के भ्रमण ने शहर के ऐतिहासिक और शहरी परिवेश से सभी को रूबरू कराया.
इसके बाद दोपहर में ‘गजरा कैफे’ में भोजन के दौरान वडोदरा के सामाजिक ताने-बाने पर बात हुई. यहां हाशिए पर मौजूद समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और स्थानीय एनजीओ के योगदान पर चर्चा की गई. पूरे आयोजन ने यह साबित किया कि कला और विरासत सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया भी हैं.
नाट्य प्रस्तुति ‘अनुभूति’ ने मोहा मन
महल के ऐतिहासिक प्रांगण में ‘मिथ मेड मैनिफेस्ट (अनुभूति)’ शीर्षक से एक विशेष नाटक प्रस्तुत किया गया. यह प्रस्तुति मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के चित्रों में नजर आने वाले प्रमुख महिला किरदारों पर आधारित थी. नाटक के जरिए पौराणिक कहानियों, दिव्यता, नारीत्व और मानवीय भावनाओं को बेहद खूबसूरती से मंच पर उतारा गया.
विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश
सोपान के निदेशक सिद्धांत मोहता ने बताया कि ‘ऐक्यम’ कला, वास्तुकला और नए विचारों को एक मंच पर लाने का प्रयास है. वडोदरा की समृद्ध विरासत इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने के लिए सबसे सही जगह है.
महारानी डॉ. राधिकराजे गायकवाड़ ने कहा कि वडोदरा की पहचान पीढ़ियों से मिले संरक्षण और कलात्मक आदान-प्रदान से बनी है. राजा रवि वर्मा और गायकवाड़ दरबार की परंपराएं हमारी धरोहर हैं और इन्हें उत्सव के रूप में मनाना गर्व की बात है. वहीं, वडोदरा म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू ने कहा कि शहर की पहचान उसके महलों और संग्रहालयों में बसी है, और ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं.
शाही भोज के साथ हुआ समापन
पूरे दिन चले इस भव्य आयोजन का समापन बड़ौदा के महाराजा समरजीतसिंह गायकवाड़ और महारानी डॉ. राधिकराजे गायकवाड़ द्वारा आयोजित रॉयल डिनर के साथ हुआ. मेहमानों को राजघराने की पारंपरिक पाक-कला का स्वाद चखने और शाही आवभगत का अनूठा अनुभव मिला.