वडोदरा में सजा 'ऐक्यम' का मंच, भारतीय और यूरोपीय कला-संस्कृति का दिखा अनूठा संगम, 10 देशों के दूतावास भी बने भागीदार

सांस्कृतिक संस्था ‘सोपान’ के मंच ‘ऐक्यम’ के दूसरे संस्करण ‘रस एंड रियलिज्म’ का वडोदरा में भव्य आयोजन हुआ. कार्यक्रम में भारतीय और यूरोपीय कला, वास्तुकला और इतिहास के गहरे जुड़ाव पर विशेषज्ञों ने खुलकर चर्चा की. हेरिटेज वॉक से लेकर राजा रवि वर्मा की दुर्लभ पेंटिंग्स तक, विरासत और सामाजिक समावेशन के कई रंग देखने को मिले.

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सांस्कृतिक संस्था 'सोपान' के मंच 'ऐक्यम' के दूसरे संस्करण 'रस एंड रियलिज्म' का वडोदरा में भव्य आयोजन हुआ.

सांस्कृतिक संस्था ‘सोपान’ के मंच ‘ऐक्यम’ (AIKYAM) के दूसरे संस्करण ‘रस एंड रियलिज्म’ ने वडोदरा में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विरासत को एक नए रूप में पेश किया. इस खास आयोजन में कला, इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का खूबसूरत मेल देखने को मिला. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वडोदरा की समृद्ध कलात्मक विरासत के जरिए भारतीय और यूरोपीय परंपराओं के साझा इतिहास को सामने लाना रहा. इस 2026 संस्करण को गुजरात पर्यटन, वडोदरा सांसद डॉ. हेमांग जोशी, डॉ. राधिकराजे गायकवाड़, ‘इंक्रेडिबल इंडिया’, वडोदरा नगर निगम, बड़ौदा हेरिटेज ट्रस्ट और FGI का मजबूत सहयोग मिला. वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिनिधिमंडल और 10 यूरोपीय दूतावासों ने भी इसमें अपनी सहभागिता निभाई.

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कला और उसके संरक्षण पर मंथन

कार्यक्रम की शुरुआत एफजीआई ऑडिटोरियम में ‘कन्वर्सेशन्स ऑन आर्ट इन वडोदरा’ सत्र से हुई. इसमें महारानी डॉ. राधिकराजे गायकवाड़ और अंतरराष्ट्रीय कला विशेषज्ञ डेबोरा स्वैलॉ ने अपने विचार रखे. डॉ. राधिकराजे ने वडोदरा के सांस्कृतिक स्वरूप और लक्ष्मी विलास पैलेस के दुर्लभ कला संग्रह पर रोशनी डाली. वहीं, डेबोरा स्वैलॉ ने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पुरानी कलाकृतियों का संरक्षण और जीर्णोद्धार बेहद जरूरी है.

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हेरिटेज वॉक और राजा रवि वर्मा की कलाकृतियां

उद्घाटन सत्र के बाद अतिथियों को सिटी टूर कराया गया. इस दौरान सभी ने महाराजा फतेहसिंह म्यूजियम का दौरा किया और वहां मौजूद प्रख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा की ऐतिहासिक कृतियों को करीब से देखा. सूर सागर झील के आसपास के भ्रमण ने शहर के ऐतिहासिक और शहरी परिवेश से सभी को रूबरू कराया.

इसके बाद दोपहर में ‘गजरा कैफे’ में भोजन के दौरान वडोदरा के सामाजिक ताने-बाने पर बात हुई. यहां हाशिए पर मौजूद समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और स्थानीय एनजीओ के योगदान पर चर्चा की गई. पूरे आयोजन ने यह साबित किया कि कला और विरासत सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया भी हैं.

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नाट्य प्रस्तुति ‘अनुभूति’ ने मोहा मन

महल के ऐतिहासिक प्रांगण में ‘मिथ मेड मैनिफेस्ट (अनुभूति)’ शीर्षक से एक विशेष नाटक प्रस्तुत किया गया. यह प्रस्तुति मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के चित्रों में नजर आने वाले प्रमुख महिला किरदारों पर आधारित थी. नाटक के जरिए पौराणिक कहानियों, दिव्यता, नारीत्व और मानवीय भावनाओं को बेहद खूबसूरती से मंच पर उतारा गया.

विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश

सोपान के निदेशक सिद्धांत मोहता ने बताया कि ‘ऐक्यम’ कला, वास्तुकला और नए विचारों को एक मंच पर लाने का प्रयास है. वडोदरा की समृद्ध विरासत इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने के लिए सबसे सही जगह है.

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महारानी डॉ. राधिकराजे गायकवाड़ ने कहा कि वडोदरा की पहचान पीढ़ियों से मिले संरक्षण और कलात्मक आदान-प्रदान से बनी है. राजा रवि वर्मा और गायकवाड़ दरबार की परंपराएं हमारी धरोहर हैं और इन्हें उत्सव के रूप में मनाना गर्व की बात है. वहीं, वडोदरा म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू ने कहा कि शहर की पहचान उसके महलों और संग्रहालयों में बसी है, और ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं.

शाही भोज के साथ हुआ समापन

पूरे दिन चले इस भव्य आयोजन का समापन बड़ौदा के महाराजा समरजीतसिंह गायकवाड़ और महारानी डॉ. राधिकराजे गायकवाड़ द्वारा आयोजित रॉयल डिनर के साथ हुआ. मेहमानों को राजघराने की पारंपरिक पाक-कला का स्वाद चखने और शाही आवभगत का अनूठा अनुभव मिला.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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