Jami Masjid Bharuch: गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें दावा किया गया है कि भरूच की ऐतिहासिक जामी मस्जिद असल में एक जैन-हिंदू मंदिर थी. पिटीशनर ने धार्मिक कलाकृतियों को नुकसान पहुंचने का आरोप भी लगाया है और तीर्थंकर मल्लिनाथ से जुड़ी मूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक जवाब मांगा
जस्टिस निशा एम ठाकोर ने शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2026 को हरि शंकर जैन और 4 अन्य लोगों की अर्जी पर सुनवाई की. कोर्ट ने केंद्र सरकार और दूसरे केंद्रीय अधिकारियों को आरोपों पर विस्तृत निर्देश लेने और 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
खुद को जैन-हिंदू समुदाय का सदस्य बताने वाले याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि संरक्षित ढांचे में मल्लिनाथ की एक मूर्ति है. उनके वकील ने मूर्तियों और दूसरी कलाकृतियों को नुकसान पहुंचने के आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और एक वीडियो पेश किया. तत्काल अंतरिम सुरक्षा की मांग करते हुए, पिटीशनर ने तर्क दिया कि अगर तुरंत दखल नहीं दिया गया तो मूर्ति को और नुकसान हो सकता है.
स्मारक की सुरक्षा पर बहस
अर्जी में ये ज्यूडिशियल डिक्लेरेशन करने की मांग की गई है कि जो ढांचा ASI के रिकॉर्ड में आधिकारिक तौर पर मस्जिद के रूप में दर्ज है, वो असल में एक जैन-हिंदू मंदिर है. पिटीशनर ने स्मारक की कथित ऐतिहासिक बैकग्राउंड और ‘प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958’ के प्रावधानों का हवाला दिया. उन्होंने तर्क दिया कि ASI की कानूनी जिम्मेदारी है कि वो ढांचे और उसमें मौजूद चीजों की सुरक्षा करे.
केंद्रीय अधिकारियों को रिप्रेजेंट करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि स्मारक का रखरखाव लागू कानूनों के मुताबिक किया जा रहा है. हाईकोर्ट ने गौर किया कि पिटीशनर संबंधित अधिकारियों से राहत मांगे बिना ही कोर्ट पहुंचे थे. हालांकि अदालत ने स्मारक और उसमें मौजूद मूर्ति की सुरक्षा के लिए ASI के वैधानिक कर्तव्य पर भी जोर दिया.
विवाद कैसे शुरू हुआ?
ये कानूनी चुनौती ‘राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति’ के अभियान के बाद आई है, जिसने मई से इस जगह को जैन धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता दिलाने के लिए सिग्नेचर कैंपेन और पब्लिक इवेंट्स आयोजित किए हैं. इससे पहले ASI के वडोदरा सर्कल ने भरूच जिला प्रशासन को स्मारक पर बड़ी तादाद में लोगों के जुटने की सोशल मीडिया अपीलों के बारे में चेतावनी दी थी, जिसमें संभावित नुकसान और सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर चिंता जताई गई थी.
मस्जिद के ट्रस्टीज ने भी एहतियाती उपायों की मांग करते हुए स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि 3 मार्च को एक ग्रुप परिसर में दाखिल हुआ और उसने हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया, जिसमें दीये जलाना और फूल चढ़ाना शामिल था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने में मदद की.