पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से सांसद युसूफ पठान द्वारा ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने के महज दो महीने बाद गुजरात सरकार ने उन पर बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने वडोदरा नगर निगम के उस विवादित 978 वर्ग मीटर के प्लॉट को युसूफ पठान को आवंटित करने की मंजूरी दे दी है, जिसे लेकर कभी उन्हें अवैध कब्जे का नोटिस थमाया गया था.
भाजपा शासित वडोदरा नगर निगम के भूमि संपदा विभाग ने राज्य सरकार के 13 अगस्त के सरकारी संकल्प के आधार पर इसका प्रस्ताव तैयार कर नगर निगम की स्थायी समिति के समक्ष मंजूरी के लिए पेश कर दिया है.
500 वर्ग मीटर ‘गिफ्ट’, बाकी रियायती दर पर
राज्य सरकार के प्रस्ताव के तहत इस प्लॉट के आवंटन की शर्तों के मुताबिक, कुल 978 वर्ग मीटर में से 500 वर्ग मीटर जमीन युसूफ पठान को आवासीय उपयोग के लिए ‘गिफ्ट’ के रूप में दी जाएगी. बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन रक 17 मार्च 2026 को तय किए गए मूल्यांकन की 55 फीसदी रियायती दर पर ट्रांसफर की जाएगी. साथ ही, नगर निगम को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राज्य का राजस्व विभाग VMC को इसके समतुल्य मूल्य की जमीन आवंटित करेगा.
यह विवादित प्लॉट वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में स्थित है. यह पठान परिवार के मशहूर सफेद बंगले से बिल्कुल सटा हुआ है. इसी बंगले में युसूफ और उनके छोटे भाई इरफान पठान अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं. जुलाई 2026 में VMC ने इस पूरे प्लॉट का बाजार मूल्य लगभग 20.5 रुपये करोड़ आंका था.
14 साल पुराना विवाद
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते सुरक्षा कारणों का हवाला देकर युसूफ पठान ने 2012 में बिना सार्वजनिक नीलामी के 99 साल की लीज पर यह जमीन मांगी थी. VMC ने तब मंजूरी दे दी थी, लेकिन 2014 में गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने नीलामी को बाईपास करने वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. इसके बावजूद जमीन पर पठान परिवार की फेंसिंग और कब्जा बना रहा.
जून 2024 में जब युसूफ पठान ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर बहरामपुर से लोकसभा चुनाव जीता, तो उसके कुछ ही दिन बाद VMC ने उन्हें कथित अतिक्रमण हटाने का कानूनी नोटिस थमा दिया.
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
पठान ने इस नोटिस को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी. अगस्त 2025 कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा था कि बिना औपचारिक आवंटन या भुगतान के सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कैसे जारी रह सकता है. कोर्ट ने कहा था कि मशहूर हस्तियों को विशेष छूट देने से समाज में गलत संदेश जाता है. सरकार की ओर से 13 अगस्त को आवंटन होने के बाद, 31 अगस्त को युसूफ पठान के वकील ने हाई कोर्ट को सूचित किया कि मामले का अदालत के बाहर समाधान हो गया है, जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई.