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गुजरात में स्टाम्प ड्यूटी अधिकतम 5 लाख रुपये, स्टाम्प अधिनियम में कई बदलाव

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मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के निर्देशन में राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने गुजरात स्टाम्प अधिनियम के कई प्रावधानों में संशोधन और एडिशन किए हैं। इन संशोधनों का मकसद सार्वजनिक दरों को कम करके तथा प्रशासनिक सरलता को बढ़ाकर स्टाम्प ड्यूटी अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। स्टाम्प ड्यूटी एक्ट के ये संशोधित प्रावधान राज्य में गुरुवार, 10 अप्रैल, 2025 से लागू होंगे।

राज्य राजस्व विभाग द्वारा किए गए संशोधन

  • पैतृक संपत्ति के मामले में मृतक पुत्री के उत्तराधिकारियों द्वारा अधिकार कटौती के डॉक्यूमेंट 250 रुपये स्टाम्प शुल्क का उपयोग करके बनाए जा सकते हैं।
  • स्टाम्प ड्यूटी अधिकतम 5 लाख रुपये तक देनी होगी।
  • अधिकतम शुल्क का मौजूदा प्रावधान 8,00,000/- रुपये से अधिक के ऋण के लिए हाइपोथिकेशन डॉक्यूमेंट पर 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर रु. 15,00,000/-. हालांकि, ऐसे मामलों में जहां एक से अधिक बैंकों से ऋण लिया जाता है, वहां अधिकतम 5 लाख रुपये तक की स्टांप ड्यूटी का प्रावधान किया गया है। अधिभार के अलावा 75,00,000/- का भुगतान करना होगा।
  • सुरक्षा के मामले में 100/- का फिक्स चार्ज देना होगा। अब से 5,000/- रुपये का भुगतान करना होगा।
  • कम स्टाम्प शुल्क अदा किए जाने की स्थिति में, अगर आवेदक व्यक्तिगत रूप से शुल्क अदा करने आता है, तो डॉक्यूमेंट की तिथि से दो प्रतिशत की मासिक दर से, लेकिन छूटे हुए शुल्क की राशि का 4 गुना शुल्क वसूला जाएगा।
  • इसी प्रकार, अगर स्टाम्प ड्यूटी की चोरी सिस्टम द्वारा पकड़ी जाती है, तो ऐसे मामले में जुर्माना राशि 3 प्रतिशत हर महीने की दर से 6 गुना तक वसूलने का प्रावधान किया गया है।
  • राज्य सरकार ने एक साल से कम अवधि के पट्टे दस्तावेजों पर औसत वार्षिक किराए के 1% की जगह पर अब 250 रुपये का शुल्क वसूलने का प्रावधान किया है। (आवासीय के लिए 500/- कमर्शियल के लिए 1000/-)
  • बंधक के मामले में अगर बैंक/वित्तीय संस्थाओं द्वारा डॉक्यूमेंट पेश नहीं किए जाते हैं तथा उन पर स्टाम्प शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता है, तो ऐसे में, बैंक/फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन ऐसे डॉक्यूमेंट पर शुल्क का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होंगी।
  • इसके अलावा, यह एक्ट यह भी प्रावधान करता है कि उन डॉक्यूमेंट्स की कॉपी पर शुल्क लगाया जा सकता है जिनके लिए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट की अनुपस्थिति में कम स्टाम्प शुल्क का भुगतान किया गया है।

राज्य सरकार द्वारा गुजरात स्टाम्प अधिनियम-1958 के प्रावधानों में किए गए इन संशोधनों के अलावा अन्य संशोधन और एडिशन भी किए गए हैं। कानून के प्रावधानों के अनुसार ज्यादा चार्ज भी लगाया जाएगा। सरकार ने इन प्रावधानों के माध्यम से उद्योगपतियों और आवास ऋण धारकों पर वित्तीय बोझ कम करने का प्रयास किया है।

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