पूर्व मंत्री बचू खाबड़ का VIP अंदाज, सरकारी फायर ब्रिगेड 25 किमी दूर भेजकर धुलवाया अपना बंगला, हुआ विवाद
नगर पालिका प्रशासन और दमकल विभाग बैकफुट पर आ गया है. नगर पालिका के मुख्य अधिकारी और अध्यक्ष के अनुसार, स्थिति संज्ञान में आते ही वाहन को वापस बुलाने और मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं.
नगर पालिका प्रशासन और दमकल विभाग बैकफुट पर आ गया है. (Photo: ANI)
गुजरात के दाहोद जिले से वीआईपी कल्चर और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. बीजेपी विधायक और पूर्व राज्य मंत्री बचूभाई खाबड़ एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं. आरोप है कि आगामी दिवाली पर्व के अवसर पर अपने निजी बंगले की साफ-सफाई और धुलाई के लिए आपातकालीन सेवा में तैनात नगर पालिका की फायर ब्रिगेड गाड़ी को बुलवाया गया.
विज्ञापन
दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया तालुका में नगर पालिका की हाई-प्रेशर दमकल गाड़ी का उपयोग किसी आग को बुझाने के लिए नहीं, बल्कि पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक बचूभाई खाबड़ के आलीशान बंगले की सफाई के लिए किया गया. सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि देवगढ़ बारिया नगर पालिका का फायर फाइटर और उसके कर्मचारी धानपुर-पीपेरो क्षेत्र स्थित विधायक के निजी आवास को हाई-प्रेशर पाइप से धोते नजर आ रहे हैं.
विज्ञापन
#WATCH | Dahod, Gujarat: A controversy has erupted in Dahod district after an emergency fire tender was allegedly deployed to wash the bungalow of Devgadh Baria MLA and former minister Bachubhai Khabad.
बताया जा रहा है कि फायर ब्रिगेड की इस गाड़ी को नगर पालिका क्षेत्र की सीमा लांघकर करीब 24 से 25 किलोमीटर दूर केवल बंगले की सफाई के लिए भेजा गया था. इमरजेंसी वाहनों के इस तरह निजी इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्ष और स्थानीय जनता ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं. जनता का कहना है कि जब आम नागरिक पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते हैं, तब सत्ता के प्रभाव में सरकारी पानी और वाहनों से नेताओं के बंगले चमकाए जा रहे हैं. इस प्रक्रिया में खर्च हुए सरकारी डीजल, कर्मचारियों की ड्यूटी और आदेश देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है.
मामला तूल पकड़ते ही नगर पालिका प्रशासन और दमकल विभाग बैकफुट पर आ गया है. नगर पालिका के मुख्य अधिकारी और अध्यक्ष के अनुसार, स्थिति संज्ञान में आते ही वाहन को वापस बुलाने और मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं. बताया गया कि प्रति लीटर नियमानुसार शुल्क जोड़कर करीब ₹2,750 से अधिक की रिकवरी और जुर्माना वसूले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है.