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ग्रांट की कमी से गुजरात में हजारों पुलिसकर्मियों का वेतन रुका, विपक्ष का आरोप- तामझाम पर खर्च हुआ सैलरी का पैसा

ग्रांट की कमी के चलते गुजरात के हजारों पुलिसकर्मियों का वेतन अटक गया है. नए साल की शुरुआत में ही ‘खाकी’ के घरों में चिंता का माहौल बन गया है. राज्य की सुरक्षा में दिन-रात तैनात पुलिसकर्मी अब अपने ही वेतन के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं.

एक तरफ गुजरात सरकार वाइब्रेंट समारोहों, सांस्कृतिक आयोजनों और सरकारी तामझाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो दूसरी ओर पुलिस विभाग के वेतन के लिए ग्रांट कम पड़ गई है. गृह और पुलिस विभाग के एक आधिकारिक पत्र ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और पुलिसकर्मियों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सरकारी पत्र के मुताबिक, पर्याप्त ग्रांट न होने के कारण दिसंबर 2025 के वेतन बिल तय समय-सीमा यानी 23 दिसंबर तक ट्रेजरी कार्यालय में जमा नहीं हो पाए. इस देरी के पीछे प्रशासनिक लापरवाही मानी जा रही है, जिसका सीधा असर हजारों पुलिसकर्मियों पर पड़ा है.

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ग्रांट की इस कमी से राज्य के प्रभावित होने वाले विभागों में सभी पुलिस कमिश्नर और रेंज कार्यालय, सीआईडी क्राइम, इंटेलिजेंस और रेलवे पुलिस , हथियारबंद यूनिट्स और SCRB गांधीनगर, साथ ही सभी जिला पुलिस अधीक्षकों के कार्यालय शामिल हैं. पुलिसकर्मियों को अपने परिवार के खर्च, बैंक की किस्तें और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, ग्रांट रिलीज में हुई देरी को लेकर पुलिस महकमे में भारी नाराजगी है.

ऐसे में विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल खड़े किए हैं कि जब तामझाम और उत्सवों के लिए बजट है, तो राज्य के रक्षकों के लिए क्यों नहीं? चर्चा यह भी है कि क्या सरकार के लिए उत्सवों की चमक, जवानों के घर के चूल्हे से ज्यादा अहम हो गई है? कांग्रेस का आरोप है की गुजरात पर 4 लाख करोड़ का कर्ज लादने वाली ये सरकार हर मोर्चे पर विफल है.

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पुलिसकर्मियों को उम्मीद थी कि नए साल की शुरुआत वेतन के साथ होगी, लेकिन अब प्रशासनिक प्रक्रियाओं और ग्रांट की खींचतान ने उनके पूरे आर्थिक प्लान को प्रभावित कर दिया है. अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्दी ग्रांट जारी कर पुलिसकर्मियों को राहत देती है.


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