दिल्ली से पटना जा रहे एक यात्री के ट्रेन के रिजर्व कोच में रखे सामान की चोरी के मामले में रेलवे को जिम्मेदार ठहराया गया है. दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को यात्री को सामान की कीमत पर ब्याज के साथ 1.20 लाख रुपये और परेशानी के लिए 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. रेलवे ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी, लेकिन आयोग ने उसे खारिज करते हुए मुआवजे का आदेश बरकरार रखा. आयोग की अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की पीठ ने 6 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया. पीठ ने कहा कि रिजर्व कोच में बिना टिकट के पैसेंजरों की एंट्री को रोकने में रेलवे की नाकामी और कर्मचारियों की लापरवाही दिखाई देती है.
2014 में हुई थी सामान की चोरी
यह मामला 7 जून 2014 का है. अजय कुमार महनंदा एक्सप्रेस से दिल्ली से पटना जा रहे थे. पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दो बिना टिकट के पैसेंजर ट्रेन के कोच में घुस आए. उन्होंने सीट को लेकर बहस शुरू कर दी. इसी दौरान यात्री का ध्यान भटकाकर वे उसका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए. बैग में सोने-चांदी के गहने, कपड़े और जरूरी दस्तावेज रखे थे. चोरी हुए सामान की कुल कीमत करीब 1.20 लाख रुपये थी. यात्री ने तुरंत रेलवे को इसकी शिकायत की, लेकिन एफआईआर दर्ज होने में देरी हुई. 23 अप्रैल 2015 को एफआईआर दर्ज की गई. मई 2017 में पुलिस ने आरोपियों का पता नहीं चलने की रिपोर्ट दाखिल कर दी.
रेलवे ने जिम्मेदारी लेने से किया था इनकार
जिला उपभोक्ता आयोग ने अप्रैल 2024 में रेलवे को लापरवाही का दोषी ठहराया था. रेलवे ने इसके खिलाफ अपील करते हुए दलील दी कि बिना बुक कराए सामान की चोरी के लिए वह जिम्मेदार नहीं है. रेलवे ने ‘रेलवे अधिनियम’ की धारा 100 का भी हवाला दिया. हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की दलीलें खारिज कर दीं. पीठ ने कहा कि रेलवे की जिम्मेदारी है कि वह रिजर्व कोच में बिना टिकट के लोगों के एंट्री को रोके. रेलवे यह भी नहीं बता सका कि उस समय ड्यूटी शेड्यूल, लॉगबुक और सुरक्षा रिपोर्ट कहां हैं. आयोग ने कहा कि रेलवे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता. इसके बाद यात्री को 1.20 लाख रुपये पर सितंबर 2017 से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज और मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये देने का आदेश बरकरार रखा गया.