TrendingAyodhya Ram MandirDharmendra & Hema MaliniBigg Boss 19Gold Price

---विज्ञापन---

मनीष सिसोदिया को हराने वाले तरविंदर मारवाह कौन? कांग्रेस छोड़कर आए थे BJP में

Tarvinder Singh Marwah Vs Manish Sisodia: मनीष सिसोदिया को जंगपुरा विधानसभा सीट से भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह ने हरा दिया है। वे सिख समुदाय के दिग्गज नेता हैं और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। आइए उनके बारे में जानते हैं...

Tarvinder Singh Marwah
Who is Tarvinder Singh Marwah: दिल्ली की सबसे हॉट सीटों में से एक जंगपुरा विधानसभा सीट से भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह जीत गए हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के दिग्गज मनीष सिसोदिया को हराया है। AAP ने मनीष सिसोदिया की सीट बदली थी, जिसका नुकसान भी उठाना पड़ा। कांग्रेस के फरहाद सूरी तीसरे नंबर पर रहे हैं। तरविंदर सिंह मारवाह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। 6 जुलाई 2022 को उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी। तरविंदर कांग्रेस की टिकट पर 2 बार साल 2015 और 2020 में जंगपुरा से ही चुनाव हार चुके हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस बार फिर जंगपुरा से ही किस्मत आजमाई और चुनाव जीते। 2015 में हारने से पहले भी वे 3 बार इस सीट से विधायक रहे। वे दिल्ली के मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। यह भी पढ़ें:केजरीवाल को हराने वाले परवेश वर्मा कौन? नई दिल्ली में पूर्व CM को दी थी कांटे की टक्कर

दिल्ली में सिखों का बड़ा चेहरा

तरविंद सिंह मारवाह दिल्ली में सिख समुदाय का बड़ा चेहरा है। वे कभी दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के करीबी थी। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वे साल 2008 में दिल्ली सरकार में मंत्री पद की रेस में भी रहे, लेकिन अरविंदर सिंह को मंत्री बना दिया गया। साल 2013 में वे आम आदमी पार्टी के मनिंदर सिंह धीर से हार गए थे। 2020 में भी कांग्रेस की सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद उन्होंने साल 2022 में कांग्रेस छोड़ दी। अपने चुनावी हलफनामे में तरिवंदर मारवाह ने 47 करोड़ की प्रॉपर्टी का ब्योरा दिया था। उन्होंने ही विधानसभा चुनाव में शराब और सिसोदिया के बाहरी होने का मुद्दा उठाया था। वे कहते थे कि जो शख्स पटपड़गंज की जनता को छोड़कर जा सकता है। वह किसी को भी छोड़ सकता है। इन दोनों मुद्दों को सुलगाने का फायदा उन्हें हुआ और जंगपुरा की जनता ने उन्हें फिर से मौका दिया। यह भी पढ़ें:Delhi Elections Result: दिल्ली में अपनी सीट ही नहीं बचा सके केजरीवाल, जानें हार के 5 कारण  


Topics: