क्या है मकसद?
‘पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल’ का मकसद है कि मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, राजेंद्र नगर, साउथ कैंपस और नॉर्थ कैंपस जैसे इलाके जहां स्टूडेंट्स ज्यादा संख्या में रहते हैं, वहां मौजूद PG को एक औपचारिक रेगुलेटरी सिस्टम के दायरे में लाना है. अब सभी PG मालिकों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा और जोनिंग अथॉरिटी से 90 दिनों के अंदर ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा. इस पूरे प्रोसेस के लिए म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की जरूरत होगी.
क्या-क्या बदलेगा?
जो PG रजिस्टर हो जाएंगे, उन्हें एक यूनिक ‘पेइंग गेस्ट रजिस्ट्रेशन नंबर’ (PGRN) दिया जाएगा. वहीं, वेरिफाइड अकोमोडेशन की जानकारी एक सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मिल सकेगी. इस प्रस्तावित बिल में सबसे ज्यादा फोकस किया गया है छात्रों से वसूले जाने वाले पीजी के किराए पर. दिल्ली सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि इलाके के हिसाब से पीजी के किराए की लीमिट तय करने के लिए एक रेंट रेगुलेशन कमेटी बनाई जाए. अब पीजी मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर तीन महीने से ज्यादा का किराया या एडवांस पेमेंट लेने की इजाजत नहीं होगी. इस प्रस्ताव के मुताबिक, पीजी छोड़ने वाले किराएदारों के लिए 30 दिन का नोटिस पीरियड जरूरी करना अनिवार्य होगा. लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर मनमाना किराया नहीं वसूल सकेंगे.