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SIR ड्यूटी पर लगे दिल्ली के टीचर्स, सरकारी स्कूलों में कैसे मैनेज हो रही छात्रों की पढ़ाई?

SIR In Delhi: दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन शुरू हो चुका है, इस काम में सरकारी स्कूल के काफी टीचर्स लगे हुए हैं, ये काम कुछ महीनों तक जारी रह सकता है, इस दौरान कई स्कूलों में पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, जिसको लेकर शिक्षकों ने चिंता जताई है.

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AI Generated Image

मुख्य बिंदु

  • दिल्ली के 2 सरकारी स्कूलों में सभी रेगुलर टीचरों को BLO ड्यूटी सौंपी गई है.
  • भलस्वा स्कूल में अभी तकरीबन 1,200 छात्रों को खास तौर से गेस्ट टीचर पढ़ा रहे हैं.
  • टीचर एसोसिएशन को डर है कि अक्टूबर तक पढ़ाई का गंभीर नुकसान हो सकता है.
  • दिल्ली सरकार ने तैनाती से जुड़ी समस्याओं को हल करने का वादा किया है.
  • टीचर्स स्कूलों के बीच चुनावी ड्यूटी को समान रूप से बांटने की मांग कर रहे हैं.

Delhi Government Schools Teachers In SIR Duty: दिल्ली के 2 सरकारी स्कूलों में रेगुलर टीचरों की भारी कमी हो गई है क्योंकि उन्हें वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के तहत चुनाव से जुड़े कामों में लगा दिया गया है. शिक्षा विशेषज्ञों और स्कूल अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इस कदम से एकेडमिक ईयर के अहम समय में छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ सकता है.

इन स्कूलों में परेशानी

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक भलस्वा के एक सरकारी स्कूल में, तकरीबन 20 रेगुलर टीचरों को बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि 22 सेक्शन में फैले करीब 1,200 छात्रों की क्लास संभालने के लिए सिर्फ 15 गेस्ट टीचर अवेलेबल हैं. जीटीबी नगर के पास एक और सरकारी स्कूल में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई है, जहां 22 रेगुलर टीचरों को चुनाव का काम सौंपा गया है.

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पढ़ाई में रुकावट!

स्कूल अधिकारियों का मानना ​​है कि रेगुलर टीचरों की लंबी गैरमौजूदगी से अक्टूबर तक पढ़ाई में बड़ी रुकावट आ सकती है. उनका तर्क है कि चुनाव ड्यूटी जरूरी है, लेकिन कुछ ही स्कूलों के पूरे टीचिंग स्टाफ को काम पर लगाने के बजाय इसे स्कूलों के बीच ज्यादा निष्पक्ष रूप से बांटा जाना चाहिए.

टीचर्स पर जिम्मेदारी

चुनाव अधिकारियों के एक आधिकारिक आदेश में बताया गया है कि SIR के काम में लगाए गए टीचर वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, क्लर्क का काम, डेटा एंट्री, वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट तैयार करने और चुनाव से जुड़े अन्य कामों में मदद करेंगे. आदेश में ये भी चेतावनी दी गई है कि इन जिम्मेदारियों को निभाने में लापरवाही या नाकामी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.

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सरकार ने दिलाया भरोसा

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने चिंताओं को स्वीकार किया और भरोसा दिलाया कि चुनाव रिविजन प्रॉसेस और छात्रों की शिक्षा, दोनों का ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर टीचरों की तैनाती में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो सरकार सुधारात्मक कदम उठाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि चुनाव के काम में लगाए गए टीचरों को उनकी अतिरिक्त जिम्मेदारियों के लिए भुगतान किया जाएगा और टीचरों के संगठनों की तरफ उठाई गई चिंताओं पर विचार किया जाएगा.

टीचर्स की क्या है मांग?

इससे पहले, गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने दिल्ली सरकार से गुजारिश की है कि जहां भी रेगुलर टीचर चुनाव ड्यूटी में लगे हों, वहां गेस्ट टीचर नियुक्त किए जाएं. एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि सीनियर टीचर्स की कमी के कारण हजारों छात्रों, खासकर 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को नुकसान हो सकता है. शिक्षा कार्यकर्ता और वकील अशोक अग्रवाल ने भी जोर दिया कि चुनाव कराना एक अहम लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है, लेकिन क्लासरूम की पढ़ाई से समझौता नहीं किया जाना चाहिए. टीचरों ने भी चिंता जताई है कि अनिश्चित शेड्यूल के कारण लेसन प्लानिंग मुश्किल हो जाती है और आखिरकार छात्रों की एकेडमिक प्रोग्रेस पर असर पड़ता है, जबकि तैनाती के फैसलों पर टीचर्स का बहुत कम कंट्रोल होता है.

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निष्कर्ष

चुनाव से जुड़े कामों के लिए रेगुलर टीचरों की तैनाती ने लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों और अच्छी शिक्षा के बीच संतुलन बनाने को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं. हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों की पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन टीचरों का मानना ​​है कि तुरंत सुधार वाले कदम उठाने की जरूरत है. एडिशनल गेस्ट टीचरों की नियुक्ति और चुनावी ड्यूटी को स्कूलों में समान रूप से बांटने से क्लासरूम में पढ़ाई बिना रुकावट जारी रखने में मदद मिल सकती है. वोटर लिस्ट में चल रहे संशोधन के दौरान छात्रों के हितों की रक्षा के लिए चुनावी प्रक्रियाओं और शैक्षणिक गतिविधियों, दोनों का सही तरीके से जारी रहना जरूरी होगा.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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