NS राजा सुब्रमणि बने देश के नए CDS, आज संभाला पद, जानें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के सामने क्या-क्या होंगी चुनौतियां?

Chief of Defence Staff: देश को नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिल गए हैं। बिपिन रावत और अनिल चौहान के बाद राजा सुब्रमणि को CDS बनाया गया है। जिन्होंने आज अनिल चौहान का कार्यकाल खत्म होने के बाद पदभार संभाला।

CDS NS Raja Subramani

राज सुब्रमणि देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं।

ऑपेरशन सिंदूर और कई देशों के बीच चल रहे युद्ध को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय अपनी तीनों सेनाओं को अपडेट करने में लगा है। इसी प्रक्रिया के तहत एक बड़ा बदलाव किया गया है। आज चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का कार्यकाल खत्म हो गया है। उनकी जगह लेफ्टिनेंट एन.एस. राजा सुब्रमणि को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाया गया है, जिन्हें आज नियमों के अनुसार औपचारिक रूप से पद भी संभाल दिया, लेकिन नए CDS के सामने कई चुनोतियां हैं। अनिल चौहान के अधूरे कामों के साथ ही सेना के लिए ऐसे कई काम हैं, जिन्हें पूरा करना और कराना इनके लिए एक बड़ा टास्क हैं।

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पहाड़ बनकर खड़ी हैं ये 5 चुनौतियां

  1. थिएटर कमांड्स का गठन करना
    2 डिफेंस में ज्यादा से ज्यादा नई पीढ़ी के आर्म्स को लाने के साथ ही रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना
  2. चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सुरक्षा, LAC और LoC की सीमाओं पर पॉलिटिकल कंट्रोल करने के साथ ही इंडियन फोर्स की जवाबी क्षमता मजबूत करना।
  3. रक्षा बजट तीनों सेनाओं के बीच फंड के आवंटन को लेकर उचित निर्णय लेना, जिससे डिफेंस आधुनिकीकरण भी प्रभावित न हो और खर्च भी सीमित रहे।
  4. अग्निपथ योजना की समीक्षा करके इसके संचालन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान करना और इसे सुचारू रूप से लागू करना।

40 साल का अनुभव आएगा काम

जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को इंडियन आर्मी का 40 साल का अनुभव है। वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार भी रह चुके हैं। उनके सामने इन जटिल सुधारों को तेजी से लागू करने की जिम्मेदारी है, क्योंकि सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन से जुड़े रणनीतिक मामलों का जानकार माना जाता है। उन्हें भारतीय सेना के नॉर्दन कमांड के साथ ही सेंट्रल कमांड का भी अनुभव है, लेकिन अब सीडीएस के तौर पर उनकी असली परीक्षा संस्थागत सुधारों में होगी।

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कुछ दिन पहले ही पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि ढांचागत बदलाव सबसे बड़ी चुनौती हैं। असली चुनौती हमेशा सोच और मानसिकता बदलने की रही है। अगर लोगों की सोच बदल जाए तो बाकी बदलाव अपने आप होने लगते हैं। उन्होंने कहा था कि थिएटर कमांड की प्रक्रिया में हम दूसरे देशों से करीब 10 से 15 साल पीछे हैं। अगर हम काम एक-एक करके करेंगे तो इसमें बहुत ज्यादा वक्त लग जाएगा। इसलिए हमारी कोशिश है कि कई काम एक साथ किए जाएं।

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