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जामिया में होंगी अब ऑनलाइन क्लास, विरोध-प्रदर्शनों के बीच यूनिवर्सिटी का बड़ा ऐलान

Jamia University Protest: दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों का जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, स्टूडेंट्स और गार्ड्स के बीच झड़प भी देखने को मिली. बढ़ते विवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्लास ऑनलाइन करने का फैसला लिया.

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जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (AI Image)

Jamia Millia Islamia: दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में कैंपस के अंदर प्रदर्शनकारी छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव के बाद कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया गया है. ये विरोध प्रदर्शन यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनावों को फिर से बहाल करने की छात्रों की मांग को लेकर हो रहा है. तनाव तब और बढ़ गया जब सुरक्षा गार्ड्स ने प्रदर्शनकारी छात्रों की तरफ से लगाए गए टेंट को हटाने की कोशिश की; इन तंबुओं में वो स्टूडेंट्स भी थे जो भूख हड़ताल पर बैठे थे. इस घटना के कारण कैंपस में अशांति फैल गई.

कांग्रेस नेताओं पर उकसाने का आरोप

जामिया के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी ने आरोप लगाया कि एक दिन पहले कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद के यूनिवर्सिटी विजिट ने इस हालात को और बिगाड़ा. रिजवी के मुताबित, ये दोनों नेता दीवार फांदकर कैंपस में दाखिल हुए, जिससे संस्थान का माहौल खराब हुआ. उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं की हरकतों ने छात्रों को एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बनने के लिए उकसाया. रजिस्ट्रार ने ये भी कंफर्म किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को लेकर दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

यह भी पढ़ें- हिरासत में लिए गए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने गए थे जामिया

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कब से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

ये विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ, जिसमें छात्र ‘जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ’ (JMISU) को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे हैं. छात्र इस संघ को दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जिसे 2006 में कैंपस में हुई हिंसा की घटनाओं के बाद भंग कर दिया गया था. बताया जाता है कि उस हिंसा के कारण शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ा था.

AISA ने प्रशासन पर लगाए आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. संगठन का दावा है कि इस घटना के दौरान उन छात्रों को भी निशाना बनाया गया, जो भूख हड़ताल पर बैठे थे. हालांकि यूनिवर्सिटी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.

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लेफ्ट सांसद की शिक्षा मंत्री को चिट्ठी

21 अक्टूबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लिखे एक चिट्ठी में, CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले लगभग 2 दशकों से विश्वविद्यालय में कोई निर्वाचित छात्र संघ नहीं है. उन्होंने अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता की गारंटी देने वाले संवैधानिक प्रावधानों, छात्रों के अधिकारों पर UGC के दिशानिर्देशों, और छात्र चुनावों पर लिंगदोह समिति की सिफारिशों का हवाला दिया.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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