जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए प्रशासन ने दो बड़े कदम उठाए हैं. एक तरफ जहां दिवाली की छुट्टियों (8 नवंबर 2026) तक सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं और दूसरे मिड-टर्म एग्जाम ऑनलाइन कर दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर धरना स्थल खाली न करने वाले छात्रों को चीफ प्रॉक्टर ने कड़ा अल्टीमेटम थमा दिया है. विश्वविद्यालय में 26 अक्टूबर को कुलपति की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कैंपस के ताजा हालात पर चर्चा की गई. बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए 8 नवंबर तक पढ़ाई पूरी तरह ऑनलाइन मोड में चलेगी. इसके बाद स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी. साथ ही छात्रों के सेकंड मिड-टर्म सेमेस्टर परीक्षाएं भी ऑनलाइन ही कराई जाएंगी, जिसकी गाइडलाइंस संबंधित डीन और परीक्षा नियंत्रक तय करेंगे. पीएचडी रिसर्च स्कॉलर्स को भी ऑनलाइन संपर्क में रहने को कहा गया है.
छात्र रेहान खान को अंतिम नोटिस जारी
चीफ प्रॉक्टर कार्यालय ने नॉर्थ कैंपस में भूख हड़ताल पर बैठे भूगोल विभाग के छात्र रेहान खान को अंतिम नोटिस जारी किया है. नोटिस में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी ने छात्रों के हित में मांग पत्र को सैद्धांतिक मंजूरी देकर सुबह ही आदेश जारी कर दिया था. इसके बाद अधिकतर छात्रों ने धरना खत्म कर दिया, लेकिन कुछ छात्र अब भी अड़े हुए हैं. अधिकारियों की तीन घंटे की समझाइश के बाद भी जब छात्र नहीं माने, तो प्रशासन ने इसे हठधर्मिता और निजी हित करार दिया.
नोटिस में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि गुलिस्तां-ए-गालिब इमारत-जहां राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभाग हैं, में छात्रों की मौजूदगी गैरकानूनी है. विभागों के ताले तोड़े गए हैं और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है. प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को अंतिम मौका देते हुए तुरंत नॉर्थ कैंपस और गालिब लॉन खाली करने का आदेश दिया है. चेतावनी दी गई है कि अगर आदेश नहीं माना गया, तो छात्रों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी.
नॉर्थ कैंपस में धरने पर अड़े रहे छात्र
हालांकि, रजिस्ट्रार द्वारा मांगें नोटिफाई किए जाने के बावजूद कुछ छात्र नॉर्थ कैंपस में धरने पर अड़े रहे. नोटिस के मुताबिक, सुबह करीब 8:50 बजे वरिष्ठ फैकल्टी और उच्च अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पॉलिटिकल साइंस बिल्डिंग में छात्र से मुलाकात की और करीब तीन घंटे तक बहुत ही विनम्र तरीके से भूख हड़ताल खत्म करने की समझाइश दी. इसके बावजूद छात्र ने किसी की बात नहीं मानी और हठधर्मिता दिखाई. प्रशासन का कहना है कि यह न केवल विश्वविद्यालय के आदेश का उल्लंघन है, बल्कि निजी हितों के लिए मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश जैसा दिखता है.