Justice Ranjana Desai Got SIR Notice: दिल्ली की वोटर लिस्ट में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ के तहत, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई और उनके परिवार के 3 सदस्यों को चुनाव आयोग से नोटिस मिले हैं. देसाई, उनके पति प्रकाश देसाई, बेटे माइक देसाई और बहू साक्षी देसाई को ‘पिछले SIR से अनमैप्ड’ कैटेगरी में रखा गया है.
‘पिछले SIR से अनमैप्ड’ का क्या मतलब है?
ये कैटेगरी आम तौर पर तब लागू होती है जब किसी वोटर की मौजूदा जानकारी को वोटर लिस्ट के पिछले रिविजन के रिकॉर्ड से नहीं जोड़ा जा सकता. दूसरे वोटरों को नाम, डेट ऑफ बर्थ या परिवार की जानकारी से जुड़ी समस्याओं के कारण मार्क किया गया है. ऐसा नोटिस मिलने का मतलब ये नहीं है कि शख्स को वोट देने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है. संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) कोई फैसला लेने से पहले वोटर के जवाब और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स की जांच करता है.
मनीष सिसोदिया और उनके परिवार को नोटिस
दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को एसआईआर के तहत नोटिस जारी किया गया है. सिसोदिया के अलावा उनकी वाइफ सीमा सिसोदिया और बेटे मीर सिसोदिया को भी मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में विसंगतियों को लेकर नोटिस भेजा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, सिसोदिया को जारी नोटिस में कारण साफ नहीं किया गया है. वहीं, उनके बेटे मीर के नोटिस में माता-पिता के नाम से जुड़ी विसंगति का जिक्र किया गया है. उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के नोटिस में उनके नाम में फर्क को नोटिस का आधार बताया गया है.
ये नोटिस दिल्ली के लाखों वोटरों के वेरिफिकेशन की एक बड़े प्रॉसेस का हिस्सा हैं, जिनकी मौजूदा वोटर जानकारी को पिछली वोटर लिस्ट के रिकॉर्ड से जोड़ा नहीं जा सका या जिनमें कुछ कमियां पाई गईं. कई सीनियर मौजूदा और रिटायर्ड नौकरशाहों को भी ऐसे ही नोटिस मिले हैं. ऐसे में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए हैं.
जाने-माने लोगों को SIR नोटिस
नेशनल कैपिटल में कई हाई-प्रोफाइल वोटरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनमें दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं. दिल्ली की नेता रेखा गुप्ता को भी नोटिस मिला था, लेकिन बाद में अधिकारियों ने उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच की और उनकी वोटर एंट्री को सही माना.
33 लाख वोटर्स को नोटिस
दिल्ली SIR जांच के दायरे में आ गया है क्योंकि 33 लाख से ज्यादा वोटरों को ‘नो मैपिंग’ या ‘लॉजिकल कमियों’ के कारण मार्क किया गया था. 31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में पिछली लिस्ट की तुलना में काफी कम नाम थे. जिनके नाम इस लिस्ट में हैं उन्हें अधिकारियों को पास जरूरी डॉक्यूमेंट्स शामिल करने होंगे.
सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर को एक अर्जी पर सुनवाई करने वाला है, जिसमें नोटिस और वोटरों को मार्क करने के लिए इस्तेमाल किए गए क्राइटेरिया में ज्यादा पारदर्शिता की मांग की गई है. दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी, नोटिस का निपटारा 29 अक्टूबर तक होगा और फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी.