दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो बड़ी सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर का तीसरा चरण है जिसकी संशोधित लागत 1635.03 करोड़ रुपये को मंजूरी मिल गई है. सराय काले खां से मयूर विहार तक बनने वाला यह साढ़े तीन किलोमीटर लंबा कॉरिडोर पिछले कई सालों से अटका हुआ था. जून तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके बाद मयूर विहार फेज-1 से एम्स तक का साढ़े नौ किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह सिग्नल मुक्त हो जाएगा. इससे सराय काले खां, रिंग रोड और एनएच-24 पर लगने वाले भारी जाम से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
दक्षिणी दिल्ली के लिए छह लेन कॉरिडोर
कैबिनेट ने दक्षिणी दिल्ली के व्यस्त एमबी रोड पर भी जाम खत्म करने के लिए करीब पांच किलोमीटर लंबे छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी है. इस पूरी परियोजना पर लगभग 1471.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसका निर्माण दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) द्वारा किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के तहत जी ब्लॉक से पुल प्रह्लादपुर तक एलिवेटेड रोड के साथ दो अंडरपास भी बनाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के पूरे होने से दक्षिणी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में गाड़ियों की आवाजाही आसान हो जाएगी. सरकार का मकसद सड़कों के जाल को इस तरह फैलाना है कि लोगों का कीमती समय जाम में बर्बाद न हो.
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डबलडेकर कॉरिडोर और अंडरपास की सौगात
एमबी रोड प्रोजेक्ट के पहले चरण में साकेत जी-ब्लॉक से संगम विहार तक एक अनोखा डबलडेकर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. इसमें ऊपर के हिस्से पर मेट्रो चलेगी जबकि नीचे वाले हिस्से पर गाड़ियां फर्राटा भर सकेंगी. इस 2.42 किलोमीटर लंबे हिस्से का काम इसी साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी है. दूसरे चरण में संगम विहार से मां आनंदमाई मार्ग तक छह लेन की सड़क बनेगी जहां मेट्रो लाइन जमीन के नीचे होगी. इसके अलावा साकेत जी-ब्लॉक और बीआरटी कॉरिडोर पर दो अंडरपास भी बनाए जाएंगे ताकि खानपुर और आंबेडकर नगर जैसे इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को रोज-रोज के ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके.
देरी की जांच और भ्रष्टाचार पर वार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बारापुला प्रोजेक्ट के निर्माण में जानबूझकर देरी की गई जिसकी वजह से इसकी लागत 964 करोड़ से बढ़कर 1635 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. बिना अनुमति पेड़ काटने जैसे कारणों से यह काम 10 साल तक लटका रहा जिसे अब बीजेपी सरकार ने सुलझा लिया है. इस अनावश्यक देरी और बढ़ती लागत के मामले की जांच अब भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को सौंप दी गई है. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जनता के पैसे की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. अब सरकार का पूरा ध्यान इन दोनों प्रोजेक्ट्स को तय समय पर पूरा करने पर है ताकि दिल्ली की जनता को सुगम यातायात मिल सके.
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