दिल्ली में SIR के बीच Form 6 बना चैलेंज, वोटर्स के लिए दस्तावेजों का संकट, मुस्लिम इलाकों में मतदाता परेशान

Delhi SIR: दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की नोटिस को लेकर लोग पहले ही परेशानियों को सामना कर रहे हैं, अब नए वोटर्स के लिए सबसे बड़ी परेशानी फॉर्म-6 भरना और इसके लिए जरूरी दस्तावेज तलाशना मुश्किल हो गया है.

SIR Voter List PTI

वोटर्स लिस्ट (Photo-PTI)

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Form 6 Challenge In Delhi: नए वोटर्स के लिए इस वक्त सबसे बड़ी परेशानी यही है कि आखिर फॉर्म 6 कैसे भरा जाए. वहीं एसआईआर के बीच उन लोगों के लिए भी फार्म 6 की प्रक्रिया सामने आ रही है, जिनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है. ऐसे लोगों को अपना नाम शामिल कराने के लिए दोबारा दावा दाखिल करना होगा और जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे.

फॉर्म 6 बना सिरदर्द

सवाल ये है कि जो शख्स पहले से वोटर रहा है, लगातार अपना वोट डालता आया है, उसका नाम अगर SIR के दौरान ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो उसे दोबारा फॉर्म 6 की प्रक्रिया से गुजरने में किन परेशानियों का सामना करना पड़ेगा? क्योंकि फॉर्म 6 के साथ उम्र और पते से जुड़े दस्तावेज देने होते हैं. कई लोगों के पास पुराने डॉक्यूमेंट्स अवेलेबल नहीं हैं, कुछ दस्तावेज आसानी से नहीं मिल रहे हैं और कुछ लोगों को ये तक जानकारी नहीं है कि कौन-सा डॉक्यूमेंट वैलिड होगा. तो आखिर Form 6 क्या है, इसे कैसे भरा जाता है और इसमें किन-किन दस्तावेजों की जरूरत होती है, आइए आपको आसान भाषा में समझाते हैं.

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मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटर्स परेशान

दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के बीच बड़ी तादाद में ऐसे वोटर्स हैं, जो सीलमपुर, जफराबाद,मुस्तफाबाद, गोंडा जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में रहते हैं, यहां के निवास अपने नाम को वोटर लिस्ट में शामिल करने को लेकर परेशान हैं. किसी का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो किसी को नोटिस मिलने के बाद ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर कौन-से दस्तावेज जमा करने हैं और जमा कहां करने हैं. खासकर ऐसे लोगों की परेशानी ज्यादा है, जिन्हें अपने बीएलओ से संपर्क करने में दिक्कत हो रही है. कई लोगों का कहना है कि ब्लॉक लेवल ऑफिसर मौके पर नहीं मिल रहा और फोन पर भी कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा.

वोटर सेंटर्स पर भीड़

मुस्तफाबाद जैसे इलाके में नोटिस और दस्तावेज जमा करने को लेकर बड़ी तादाद में लोग वोटर सेंटर्स तक पहुंच रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक मुस्तफाबाद में रोजाना करीब 1200 से 1500 लोग सुनवाई के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि औसतन करीब 500 मामलों में ही दस्तावेज जमा हो पा रहे हैं. यहां 79 हजार से ज्यादा नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है.

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सीलमपुर और मुस्तफाबाद जैसे इलाकों में भी SIR को लेकर लोगों की चिंता सामने आ रही है. चुनाव आयोग के मुताबिक नोटिस मिलना अपने आप में नाम कटने का मतलब नहीं है. नोटिस पाने वाले मतदाता संबंधित ERO या BLO के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं.

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अगर किसी एलिजिबल वोटर्स का नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं है, तो चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने का प्रावधान भी रखा है. चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर दिल्ली की वेबसाइट पर ड्राफ्ट रोल, ASDD लिस्ट और नोटिस पाने वाले लोगों की लिस्ट भी अवेलेबल है.

AAP नेता का बड़ा आरोप

आम आदमी पार्टी की नेता शगुफ्ता जुबैर चौधरी का आरोप है कि मुस्लिम बहुल इलाकों और मुस्लिम समाज को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि लोग परेशान हैं और उनकी समस्या का समाधान करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही.

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EC की तरफ से आरोपों का जवाब

हालांकि इन आरोपों को चुनाव आयोग के आंकड़ों और ऑफिशियल प्रॉसेस की रोशनी में ही देखना होगा. इलेक्शन कमिशन का कहना है कि नोटिस खास तौर पर उन मामलों में दिए गए हैं जहां पुराने एसआईआर रिकॉर्ड से लिंकिंग नहीं हो पाई या रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलीं. दिल्ली में 31.63 लाख से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं.अब सवाल ये है कि जिन लोगों के पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं, या जिन्हें BLO तक पहुंचने में परेशानी हो रही है, वो अपनी एलिजिबिलिटी साबित करने के लिए किस तरह प्रोसीजर पूरी करेंगे.

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