दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्कूलों ने बच्चों की सेहत को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. कई निजी स्कूल दिवाली के बाद खुले मैदान में होने वाली गतिविधियां कुछ समय के लिए रोकने की योजना बना रहे हैं. इसके अलावा क्लासरूम में एयर प्यूरीफायर लगाए जा रहे हैं और बच्चों को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है. कुछ स्कूलों में हवा को साफ रखने के लिए स्नेक प्लांट भी लगाए जा रहे हैं. स्कूलों का कहना है कि बच्चों को प्रदूषित हवा से बचाना उनकी पहली प्राथमिकता है.
स्कूलों में आउटडोर एक्टिविटी पर लग सकती है रोक
द्वारका के ITL इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल सुधा आचार्य ने बताया कि स्कूल बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए कई कदम उठा रहा है. उन्होंने कहा कि हवा की गुणवत्ता ठीक होने तक दिवाली के बाद खुले मैदान में होने वाली गतिविधियां रोकने की योजना है. क्लासरूम में एयर प्यूरीफायर लगाए गए हैं और स्नेक प्लांट भी रखे गए हैं. बच्चों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी गई है.
टैगोर इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल मल्लिका प्रेमन ने कहा कि स्कूल बच्चों को प्रदूषण से बचाने के साथ पर्यावरण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं. खराब हवा के दौरान बाहर की गतिविधियां कम की जाएंगी. बच्चों को पटाखे न जलाने और पर्यावरण का ध्यान रखने के लिए भी समझाया जा रहा है. रोहिणी के ग्लोबल स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल लगातार प्रदूषण के स्तर पर नजर रख रहा है. हवा खराब होने पर बच्चों को बाहर की गतिविधियों से दूर रखा जाएगा. उन्हें मास्क पहनने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की सलाह भी दी जा रही है.
5 और 6 नवंबर को स्कूलों में होंगी विशेष सभाएं
दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 5 और 6 नवंबर को विशेष सभाएं आयोजित करने का निर्देश दिया है. इन सभाओं में बच्चों को पटाखे जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा. यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर के फैसले के बाद जारी किया गया है. कोर्ट का फैसला दिवाली के दौरान पटाखे जलाने और प्रदूषण को नियंत्रित करने से जुड़े मामले में आया था. स्कूलों को बच्चों को समझाने के लिए कहा गया है कि पटाखों से हवा प्रदूषित होती है. इसका असर इंसानों के साथ-साथ दूसरे जीवों की सेहत पर भी पड़ता है. बच्चों को पटाखों की जगह मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां और बिजली वाली सजावटी लाइटें इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
अस्पतालों के पास पटाखे जलाना मना
शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को यह भी बताने के लिए कहा है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, बुजुर्गों के घरों और तय किए गए शांत इलाकों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा स्कूलों में पोस्टर, नारा लेखन, निबंध, वाद-विवाद और चित्रकला प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी. इन गतिविधियों के जरिए बच्चों को पर्यावरण बचाने का संदेश अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
9 नवंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के उप शिक्षा निदेशकों को इन निर्देशों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट 9 नवंबर तक जमा करने को कहा है. रिपोर्ट के साथ 10 ऐसी तस्वीरें भी भेजनी होंगी, जिनमें तारीख और समय दर्ज हो. इसके अलावा स्कूलों में किए गए कामों को दिखाने वाले पांच वीडियो भी जमा करने होंगे.