दिल्ली को बाढ़ से बचाने का प्लान, यमुना किनारे 99 करोड़ रुपये में बनेगी कंक्रीट की दीवार
Delhi News: दिल्ली में साल 2023 में आए बाढ़ से सबक लेते हुए राज्य सरकार ने यमुना के सेंसेटिव इलाके के पास 99 करोड़ रुपये में कंक्रीट की मोटी दीवार बनाने का प्लान बनाया है. इसके अलावा फ्लड मैनेजमेंट के लिए भी 622 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
Delhi Plans Yamuna Wall To Tackle Flood: दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी आरसीसी दीवार बनाने के लिए 99 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है. इसका मकसद निचले और संवेदनशील इलाकों में बाढ़ के खतरे को कम करना है. ये प्रस्ताव 622 करोड़ रुपये की उस बड़े बाढ़ प्रबंधन और जल निकासी योजना का हिस्सा है, जिसे बीते शुक्रवार को मंजूरी दी गई. ये फैसला दिल्ली सचिवालय में ‘फ्लड कंट्रोल बोर्ड’ की 40वीं मीटिंग में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने की.
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इन इलाकों के बीच दीवार बनाने का प्लान
ये दीवार मैगजीन रोड ड्रेन और पुराने रेलवे पुल के बीच बनाई जाएगी. ये एक सेंसेटिव हिस्सा है, जिस पर मानसून के दौरान कड़ी नजर रखी जाती है. इस दीवार का मकसद नदी का बढ़ता पानी आसपास के संवेदनशील इलाकों में घुसने से रोकना है. सरकार ने अभी तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की कोई डेडलाइन तय नहीं की है.
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दिल्ली सचिवालय में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की 40वीं बैठक की अध्यक्षता कर जलभराव और बाढ़ प्रबंधन से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं की समीक्षा की।
बैठक में दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, नालों से निकाली गई गाद के वैज्ञानिक निस्तारण, जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान… pic.twitter.com/d4flyQ4zCu
ये कदम यमुना में बार-बार आने वाली बाढ़ को देखते हुए उठाया गया है. जुलाई 2023 में पुराने रेलवे पुल के पास नदी का जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जो 205.33 मीटर के खतरे के निशान से काफी ऊपर था. इस दौरान कई इलाके डूब गए, सड़कों पर पूरी तरह पानी भर गया और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. 2025 में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, जिसके कारण संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा.
फ्लड कंट्रोल बोर्ड ने नालियों से निकाली गई गाद के साइंटिफिक ट्रीटमेंट और डिस्पोजल के लिए 260 करोड़ रुपये की 3 बायोमाइनिंग परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है. अक्सर नालियों से निकाली गई गाद को सड़कों के किनारे या नालियों के तट पर छोड़ दिया जाता है, जो बारिश के पानी के साथ बहकर वापस जल निकासी प्रणाली में चली जाती है. इससे नालियों की बारिश का पानी संभालने की क्षमता कम हो जाती है और जलभराव की समस्या पैदा होती है.
नालियों के किनारों को सुंदर बनाने की कोशिश
अधिकारियों ने बारापुल्ला नाले के विकास मॉडल से इंस्पिरेशन लेते हुए, नालियों के किनारे उपेक्षित पड़े इलाकों को सार्वजनिक स्थानों में बदलने पर भी चर्चा की. इसमें पैदल चलने के रास्ते, ग्रीन बेल्ट, पेड़-पौधे लगाना, लाइटिंग और सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना जैसी चीजें शामिल हैं. मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि अगर निकाली गई गाद वापस नालियों में चली जाती है, तो गाद निकालने के पूरे काम का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.