दिल्ली और इससे सटे नोएडा की हवा आज 8 नवंबर दिन रविवार को दिवाली के दिन बेहद जहरीली है. पूरी दिल्ली में गहरे काले रंग जैसे धुएं की परत छाई है, जिसे देखकर ही दम घुटने लगा. इस बार दिल्ली-NCR के हालात दिवाली से पहले ही इतने खराब हो गए कि ग्रैप-3 लगाना पड़ गया, लेकिन ग्रैप-3 की पाबंदियां फेल साबित हो रही हैं. क्योंकि आज सुबह हवा की गुणवत्ता बेहद खराब थी. 10 से ज्यादा इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ज्यादा यानी गंभीर श्रेणी का रिकॉर्ड हुआ. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने सुबह 6 बजे ताजा आंकड़े जारी किए, जो चौंकाने वाले हैं.
इन इलाकों में AQI आज 400 से ज्यादा रिकॉर्ड
CPCB के आज सुबह के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके की हवा सबसे ज्यादा जहरीली है, क्योंकि यहां AQI 452 रिकॉर्ड हुआ. आरके पुरम में 449 और IIT दिल्ली में 446 AQI दर्ज हुआ. पश्चिमी दिल्ली के द्वारका में AQI 444, मथुरा रोड में 425, सिरीफोर्ट में 423 और नॉर्थ कैंपस (DU) में 423 रहा. पूसा में 415, चांदनी चौक में 417, बुराड़ी क्रॉसिंग पर 411 और NSUT जाफरपुर में AQI 409 रिकॉर्ड हुआ. इसलिए लोगों को सलाह है कि इन इलाकों में जाएं तो मास्क पहनकर ही जाएं. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इन इलाकों से दूर रखेंगे तो बेहतर होगा.
इन इलाकों की हवा भी सांस लेने लायक नहीं
CPCB के आंकड़ों के अनुसार, कुछ इलाकों में AQI 400 से नीचे रहा, लेकिन वहां भी सांस लेना दूभर होगा. आज नरेला में 399, ITO पर 396 और मंदिर मार्ग में 393 AQI रहा. उत्तम नगर में 373, बुराड़ी में 370, तालकटोरा गार्डन में 369 और आया नगर में भी AQI 369 रहा. वसुंधरा एन्क्लेव में 356, टिकरी कलां और बदरपुर में 349, कराला में 337 और लोधी रोड (IITM) में 333 AQI रहा. लेकिन प्रदूषण का यह लेवल स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है. दिल्ली-NCR में ग्रैप-3 लागू है, लेकिन पाबंदियां लगने के बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई बड़ा सुधार होता नजर नहीं आ रहा.
दिल्ली की हवा देख सुप्रीम कोर्ट में बरती सख्ती
बता दें कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के हालात देखकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है और केंद्र सरकार से सवाल पूछा है कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए क्या किया? सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सिर्फ पराली जलाने से ही दिल्ली में प्रदूषण नहीं फैलता, बल्कि दिल्ली में बढ़ती वाहनों की संख्या भी इसके लिए जिम्मेदार है. आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग प्रदूषण नहीं फैलाते, बल्कि वे लोग तो पीड़ित हैं और यही लोग वायु प्रदूषण को वहन कर सकते हैं. क्योंकि वायु प्रदूषण के बावजूद यह लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए बाहर निकलते हैं और सीजनल वर्क पर निर्भर करते हैं.