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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दुष्कर्म से गर्भवती 15 साल की नाबालिग को 30 हफ्ते में गर्भपात की मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप से गर्भवती 15 साल की नाबालिग को 30 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की अनुमति दी. कोर्ट ने कहा कि उसकी मर्जी के बिना मां बनना सम्मान के साथ जीने के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होगा.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप से गर्भवती 15 साल की नाबालिग को 30 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की अनुमति दी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी दुष्कर्म के कारण कोई लड़की गर्भवती होती है, तो उसकी इच्छा के खिलाफ उसे मां बनने के लिए मजबूर करना उसके सम्मान के साथ जीने के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होगा. अदालत ने यह टिप्पणी 15 साल की दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. लड़की ने 30 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की अनुमति मांगी थी. कोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात कराने की अनुमति दे दी.

गर्भ की अवधि ज्यादा होने के बावजूद मिली अनुमति

चिकित्सा गर्भपात अधिनियम (MTP Act) की धारा 3 के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों और कानूनी शर्तों को पूरा करने पर 20 से 24 हफ्ते तक के गर्भ को खत्म करने की अनुमति दी जा सकती है. इस मामले में गर्भ 30 हफ्ते का था. न्यायमूर्ति मधु जैन ने 8 सितंबर को दिए आदेश में कहा कि सिर्फ गर्भ की अवधि कानूनी सीमा से ज्यादा हो जाने के आधार पर मामले को अलग करके नहीं देखा जा सकता. कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म के कारण गर्भ को जारी रखने के लिए पीड़िता को मजबूर करना और उसकी इच्छा के खिलाफ उस पर मां की जिम्मेदारी डालना उसके सम्मान के साथ जीने के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होगा. अदालत ने यह भी कहा कि अपने शरीर के बारे में फैसला लेने के अधिकार में यह भी शामिल है कि कोई महिला मां बनना चाहती है या नहीं.

बच्ची पहले ही झेल चुकी है गंभीर सदमा

अदालत ने कहा कि दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई महिला या लड़की को बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर करने से उसे लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है. न्यायमूर्ति मधु जैन ने कहा कि गर्भावस्था काफी आगे बढ़ चुकी होने के कारण मेडिकल प्रक्रिया में ज्यादा सावधानी की जरूरत होगी. लेकिन सिर्फ इसी वजह से नाबालिग को अपने शरीर पर अधिकार, सम्मान और बच्चे को जन्म देने से जुड़े फैसले लेने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी मेडिकल प्रक्रिया से पहले लड़की की शारीरिक स्थिति और इलाज की जांच जरूरी है. इसके साथ सभी जरूरी सुरक्षा उपायों का भी पालन करना होगा.

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माता-पिता दोनों को खो चुकी है 15 साल की लड़की

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले ‘गहरी पीड़ा’ छोड़ जाते हैं. पीठ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता सिर्फ 15 साल की बच्ची है. वह पहले ही एक भयानक दुष्कर्म का सदमा झेल चुकी है और उसके माता-पिता दोनों की भी मौत हो चुकी है. अदालत ने कहा कि जिस उम्र में एक बच्चे को सुरक्षा और देखभाल मिलनी चाहिए और उसे सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में बड़ा होने का मौका मिलना चाहिए, उस उम्र में इस बच्ची को ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, जिनका सामना किसी बच्चे को नहीं करना चाहिए.

अस्पताल को जल्द गर्भपात कराने का निर्देश

याचिका मंजूर करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और एसके अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया कि लड़की का गर्भपात जल्द से जल्द कराने की व्यवस्था की जाए. मेडिकल प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने को कहा गया. अदालत ने डॉक्टरों को यह भी निर्देश दिया कि दुष्कर्म मामले में दर्ज FIR से जुड़ी DNA पहचान और अन्य जरूरी प्रक्रिया के लिए ऊत्तकों (Tissue) या भ्रूण (Embryo) के हिस्से को सुरक्षित रखा जाए.

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सरकार उठाएगी इलाज का पूरा खर्च

कोर्ट ने सरकार को गर्भपात से जुड़े सभी खर्च उठाने का आदेश दिया है. इसमें मेडिकल प्रक्रिया, दवाएं, जांच, अस्पताल में भर्ती, भोजन और इलाज से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजें शामिल हैं. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगर मेडिकल प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसकी चिकित्सा देखभाल के लिए हर संभव कदम उठाया जाए. इसके बाद बाल कल्याण समिति कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी.

अदालत ने नाबालिग के हित को दी अहमियत

न्यायमूर्ति मधु जैन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 या 32 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए और MTP Act के कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अदालत को नाबालिग पीड़िता के हित और उसके कल्याण को उचित प्राथमिकता देनी चाहिए. इस फैसले में कोर्ट ने साफ किया कि दुष्कर्म से गर्भवती हुई नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ मां बनने के लिए मजबूर करना उसके शारीरिक और मानसिक अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय हो सकता है.

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