24 घंटे में 65 से बढ़कर 216 हुआ दिल्ली का AQI, सर्दी से पहले बढ़ते प्रदूषण का खतरा

Air Pollution In Delhi: दिल्ली में सर्दी की दस्तक के कारण उमस से जरूर राहत मिली है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी बढ़ते प्रदूषण का खतरा पैदा हो गया है. बारिश के कारण जो एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार आया था, अब वो एक बार फिर बिगड़ने लगा है.

Delhi Pollution PTI

दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण (Photo-PTI)

Delhi AQI Soars Up: 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:31 बजे दिल्ली की हवा अचानक काफी खराब हो गई और एयर क्वालिटी इंडेक्स 216 तक पहुंच गया. पॉल्यूशन के लेवल में कुछ वक्त के लिए सुधार हुआ था, लेकिन उसके तुरंत बाद आई इस तेजी ने आने वाले हफ्तों के लिए चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब राष्ट्रीय राजधानी में सर्दियां दस्तक दे रही हैं. अगर मौसम के हालात खिलाफ बने रहते हैं, तो हालात और भी मुश्किल हो सकते हैं. मौसम और हवा की गुणवत्ता के पूर्वानुमानों के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में बारिश की कोई संभावना नहीं है, इसलिए प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना रह सकता है.

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AQI पहले गिरा, फिर तेजी से बढ़ा

AQI.in की तरफ से जारी किए गए प्रति घंटे के आंकड़ों (16 अक्टूबर सुबह 10:31 बजे से 17 अक्टूबर सुबह 10:31 बजे तक) से पता चलता है कि पॉल्यूशन के लेवल में काफी उतार-चढ़ाव आया. इस पीरियड की शुरुआत में AQI तकरीबन 135 था, जो दोपहर के वक्त लगातार गिरकर करीब 65 तक आ गया. हालांकि ये सुधार ज्यादा देर तक नहीं टिका.

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शाम के वक्त वायु प्रदूषण काफी बढ़ गया; AQI 200 के पार चला गया और रात भर में तकरीबन 240 तक पहुंच गया. हालांकि बाद में इसके लेवल में कुछ कमी आई, लेकिन शनिवार सुबह ये इंडेक्स फिर से बढ़कर 216 पर पहुंच गया. ये ध्यान रखना अहम है कि AQI.in और भारत के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) अलग-अलग कैटेगरी का इस्तेमाल करते हैं. जहां AQI.in 216 के लेवल को ‘अनहेल्दी’ मानता है, वहीं CPCB 201 से 300 के बीच की रीडिंग को ‘खराब’ (Poor) कैटेगरी में रखता है. दोनों ही क्लासिफिकेशन हवा की क्वालिटी बिगड़ने का इशारे देते हैं.

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प्रदूषण और क्यों बढ़ सकता है?

IMD ने दिल्ली में आसमान साफ रहने का अनुमान जताया है और 23 अक्टूबर तक बारिश की कोई संभावना नहीं है. शुरुआत में अधिकतम तापमान 31–33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है, और 17 अक्टूबर के बाद इसमें 2–3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. बारिश न होने पर, वातावरण में वह प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं हो पाएगी जो हवा में मौजूद कुछ पॉल्यूटेंट्स को हटाने में मदद करती है. हालांकि, प्रदूषण की गंभीरता इस बात पर भी निर्भर करती है कि एमिशन का लेवल क्या है, हवा की गति और दिशा कैसी है, और वायुमंडलीय स्थितियां कैसी हैं, जो यह तय करती हैं कि प्रदूषक कितनी कुशलता से हवा में फैलकर छितरा सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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