दिल्ली की आशा कार्यकर्ताओं (ASHA Workers) के लिए आज का दिन बेहद खास और खुशी भरा है. दिल्ली सरकार ने आशा बहनों के समर्पण और दिन-रात की मेहनत को सम्मान देते हुए उनकी मासिक प्रोत्साहन राशि को 3000 रुपये से बढ़ाकर दोगुना यानी 6000 रुपये कर दिया है.
आज मंगलवार, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एक विशेष कार्यक्रम में 6690 आशा कार्यकर्ताओं को बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि के चेक खुद अपने हाथों से सौंपेंगी. सरकार का यह फैसला कितना अहम है और स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा बहनें हमारे समाज के लिए क्या-क्या काम करती हैं, आइये जानते हैं.
दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला:
दिल्ली सरकार ने 16 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय दोगुना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, दिल्ली में एक आशा कार्यकर्ता औसतन 2,000 लोगों या लगभग 400 परिवारों से जुड़ी होती हैं.
गरीब और वंचित परिवारों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में आशा वर्करों की भूमिका सबसे अहम होती है. वे दिन-रात इन परिवारों की सेवा में जुटी रहती हैं, इसलिए उन्हें बेहतर वित्तीय सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है.
कौन होती हैं आशा बहनें और क्या हैं उनकी मुख्य जिम्मेदारियां?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत आशा (Accredited Social Health Activist) कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाती हैं. गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उनका रजिस्ट्रेशन और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना, गर्भवती महिलाओं को जरूरी टीके, आयरन की गोलियां दिलाना और प्रसव के बाद मां-बच्चे दोनों की देखभाल करना, जैसे काम करती हैं. इसके अलावा महिलाओं को घर के बजाय सरकारी अस्पतालों या डिस्पेंसरी में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए परिवार को राजी करना भी इसकी जिम्मेदारियों में शामिल है.
बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए उनका पूर्ण टीकाकरण कराना और पोलियो उन्मूलन अभियानों में सक्रिय योगदान देना और गर्भनिरोधक साधन और परिवार नियोजन से जुड़ी जानकारियां परिवारों तक पहुंचाने जैसे जरूरी काम भी ये करती हैं. इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार बच्चों या महिलाओं को बड़े अस्पतालों या कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) तक तुरंत पहुंचाने में मदद करना भी इनकी जिम्मेदारियों में शामिल है.
कुल मिलाकर ये समझ लें कि आशा कार्यकर्ता हमारे समाज और स्वास्थ्य तंत्र की ताकत हैं. मानदेय दोगुना होने से न सिर्फ उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि दिल्ली के गरीब और कमजोर तबके तक स्वास्थ्य सुविधाएं और भी मजबूती से पहुंच सकेंगी.
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