उत्तर भारत में इस समय सर्दी ने कहर बरपा रखा है और दिल्ली-एनसीआर की गलियों से लेकर हाइवे किनारे तक ठिठुरन साफ महसूस की जा सकती है. तेज ठंडी हवा और गिरते पारे के बीच खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वाले लोगों के लिए हालात सबसे ज्यादा मुश्किल हो गए हैं. सड़कों, फुटपाथों और खाली पड़े प्लॉटों पर जगह-जगह लोग लकड़ियों को जलाकर अलाव तैयार कर रहे हैं, ताकि रात भर किसी तरह शरीर को गर्म रखा जा सके.
नोएडा में रैन बसेरों का इंतजाम
नोएडा में प्रशासन की ओर से रैन बसेरों में इंतजाम किए गए हैं, जहां कड़ाके की ठंड के बीच कई लोग सुरक्षित छत के नीचे सोने की कोशिश कर रहे हैं. ये अस्थायी शेल्टर उन लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं, जिनके पास न तो पक्के घर हैं और न ही महंगे किराए पर कमरा लेने की क्षमता. गर्म कंबल, बिछावन और चार दीवारी के अंदर कटती रातें बाहर अलाव के सहारे बैठने वालों की हालत से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती हैं.
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दिल्ली में भी ठंड ने ढाया कहर
वहीं दिल्ली के पांडव नगर स्थित रैन बसेरे में कहानी कुछ और ही है, यहां कई ऐसे लोग मिले जो महज एक-दो रात नहीं, बल्कि महीनों से इसी जगह को अपना ठिकाना बनाए हुए हैं. किसी के लिए यह रोजगार की तलाश में आए लोगों का आशियाना है, तो किसी के लिए मजबूरी. रैन बसेरे में रहने वाले एक व्यक्ति ने ठंड की मार और अपनी बेबसी बयां करते हुए कहा, ‘ठंड बहुत ज़्यादा है, बाहर रहना मुश्किल है. यहीं रहकर किसी तरह जिंदगी चल रही है.’
एक तरफ खुले आसमान के नीचे अलाव के सहारे ठिठुरती रातें हैं, तो दूसरी तरफ रैन बसेरे, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं.
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