छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलवाद से जुड़े हत्या के एक मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई है. मामला वर्ष 2019 में 19 वर्षीय युवक के अपहरण और हत्या से जुड़ा है. अदालत ने आरोपी पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम को हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत दोषी ठहराया. भानुप्रतापपुर स्थित विशेष सत्र न्यायालय के एनआईए न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता ने बुधवार को यह फैसला सुनाया. आरोपी की उम्र करीब 35 वर्ष बताई गई है.
नक्सलियों ने युवक का किया था अपहरण
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 26 अगस्त 2019 को कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के जुगड़ा गांव से श्यामनाथ आंचला का हथियारबंद और वर्दीधारी नक्सलियों के एक समूह ने अपहरण कर लिया था. इस समूह में पीलूराम के अलावा शंकर, मुकेश, मीना नेताम, मैनू नुरेटी, कमलेश और करीब 25 से 30 अन्य लोग शामिल थे. आरोप है कि अपहरण के बाद नक्सलियों ने जंगल में ‘जन अदालत’ लगाई. वहां श्यामनाथ पर पुलिस का मुखबिर होने का शक जताया गया और गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई. अभियोजन के अनुसार, नक्सलियों की ओर से छोड़े गए एक पर्चे में श्यामनाथ और उसके पिता सुनहेर पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाया गया था. घटना के बाद कोयलीबेड़ा थाने में पीलूराम समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.
2023 में सुरक्षा बलों ने किया था गिरफ्तार
अभियोजन पक्ष ने बताया कि मई 2023 में सीमा सुरक्षा बल और जिला रिजर्व गार्ड के संयुक्त अभियान के दौरान पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम और दो अन्य लोगों को केसकोडी के पास जंगल से गिरफ्तार किया गया था. सुरक्षा बलों ने आरोपी के पास से कथित तौर पर एक काला वॉकी-टॉकी, माओवादी साहित्य, कुछ पत्र और 6,000 रुपये नकद बरामद किए थे. पूछताछ के दौरान सालिक राम और एक अन्य आरोपी ने कथित तौर पर सुरक्षा बलों को बताया था कि उन्होंने जवानों को निशाना बनाने के लिए धुट्टा-चिलपारिस रोड पर बारूदी सुरंग बिछाई थी.
बचाव पक्ष ने लगाया झूठे केस में फंसाने का आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि सालिक राम कागबरस गांव का किसान है और उसे झूठे मामले में फंसाया गया है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने जुगड़ा गांव के सालिक आंचला की पहचान की थी, जबकि अदालत में आरोपी के रूप में पेश किया गया व्यक्ति कागबार्स गांव का रहने वाला है. हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों और जांच अधिकारी के बयानों के आधार पर माना कि आरोपी ने पांच या उससे अधिक लोगों के साथ मिलकर गैर-कानूनी समूह बनाया था. अदालत के अनुसार, आरोपी और उसके साथियों ने श्यामनाथ को घर से अगवा कर जंगल ले गए, जहां गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई.
यूएपीए की धाराओं से किया बरी
अदालत ने पीलूराम आंचला को यूएपीए की धाराओं के तहत आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी किसी प्रतिबंधित माओवादी संगठन का सदस्य या उसका सक्रिय सहयोगी था. हालांकि, हत्या और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप साबित होने के बाद अदालत ने पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
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