अंतिम संस्कार के बीच पहुंचे बिहार के तीन लोग, परिवार ने धराली में आई आपदा में मान लिया था मरा हुआ
Author: News24 हिंदी
2025-08-18 15:08:31
उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त को आपदा ने बड़ी तबाही मचाई थी। इसी बीच बिहार के चंपारण से इस आपदा में शामिल बताए गए थे। उनके परिवार ने उन्हें मरा हुआ मान लिया था, लेकिन जब वो तीनों घर लौटे, तो सभी उनको देखकर चौंक गए। परिवार को लगा था कि तीनों धराली में आई बाढ़ की वजह से मर चुके हैं। अचानक उनको देखकर घरवालों का गम खुशी में बदल गया। दरअसल, रवि कुमार, राहुल और मुन्ना आपदा के पहले गंगोत्री गए थे। बाढ़ के बाद तीनों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। जिसके कारण परिवार के लोगों ने मान लिया कि तीनों बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच लौटे
जब तीनों बिहार के पश्चिम चंपारण में सुरक्षित घर पहुंचे तो परिवार वाले अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। जिनको देखकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तीनों सुदूर गांव के रहने वाले हैं और मजदूरी करके घर खर्च चलाते हैं।
सिग्नल नहीं होने से टूटा संपर्क
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि बाढ़ आई है और उन्हें सब ढूंढ रहे हैं। क्योंकि इस आपदा के दौरान, मोबाइल सिग्नल न होने से घर वालों से कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा था। तीनों किसी काम से गंगोत्री गए थे, जो भूकंप केंद्र से लगभग 6 किमी दूर है। बाढ़ के बाद रेस्क्यू के दौरान तीनों को सेना ने ढूंढकर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया था। तीनों को हवाई मार्ग से देहरादून लेकर गए, जहां से वह हरिद्वार पहुंचे। इसके बाद तीनों बिहार में अपने गांव वापस सुरक्षित लौट कर आ गए।
मुन्ना ने बताया कि रेस्क्यू के बाद सेना ने उन्हें खाना दिया और देखभाल की। मुन्ना के पिता बोले कि आपदा के बाद बचे हुए लोगों ने बताया कि कोई नहीं बचा है। बाढ़ इतनी भयंकर थी कि सबको ले डूबी। वह अपने बेटे की खबर का इंतजार करते रहे लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए एक पुतला बनाया जिसके पूरा जलने से पहले उनका बेटा वापस आ गया।
धराली में क्या हुआ था?
बता दें, 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से जनजीवन तहस-नहस हो गया था। इससे कई होटल और लोगों के घर तबाह हो गए थे। कई मकान मलबे में दब गए। फिलहाल, लापता लोगों की तलाश हो रही है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को खोजने में लगाया हुआ है। वहीं, उत्तरकाशी के डीएम प्रशांत कुमार आर्य और एमएलए सुरेश चौहान ने पीड़ितों को 5-5 लाख की सहायता दी है। इसके अलावा राज्यसभा सांसद डा. कल्पना सैनी ने अपनी एक महीने की सैलरी और सांसद निधि ने 1 करोड़ रुपए की राशि दी है।
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