संशोधित वक्फ विधेयक बुधवार (2 अप्रैल) को लोकसभा में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को करीब 12 बजे इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा। अल्पसंख्यक एवं संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार (31 मार्च) को कहा था कि सरकार संशोधित वक्फ विधेयक को संसद में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
एक तरफ जहां कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों पर समाज में अशांति फैलाने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं NDA के सहयोगी दलों समेत कई अन्य राजनीतिक दल सरकार के समर्थन में खड़े हैं।
HAM प्रमुख जीतन राम मांझी का बयान
HAM के मुखिया जीतन राम मांझी ने एक X पोस्ट में कहा, “वक्फ संशोधन बिल 2025 कई राजनीतिक दलों के सपनों को चकनाचूर कर देगा, जो अब तक वक्फ बिल को लेकर मुसलमानों को भड़काने का काम कर रहे थे। हमारी सरकार उन्हें करारा जवाब देने जा रही है। जिस दिन यह विधेयक पारित होगा, उस दिन देश के हर मुसलमान कहेगा – ‘मोदी है तो सब कुछ मुमकिन है।'”
इंडिया ब्लॉक नेताओं की प्रतिक्रिया
NCP-SCP सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “हम चर्चा में हिस्सा लेंगे। जैसे हम उनकी बात सुनेंगे, वैसे ही हम अपनी बात भी सामने रखेंगे। हम संविधान के अनुसार काम करने वालों के साथ खड़े रहेंगे। इंडिया गठबंधन ने अच्छी चर्चा की है और हम साथ मिलकर बहस करेंगे।”
शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने तंज कसते हुए कहा, “हर रविवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू अगले हफ्ते वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने की बात करते हैं। या तो वे जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं या वे खुद नहीं चाहते कि विधेयक पेश किया जाए, क्योंकि उनके पास पूर्ण समर्थन नहीं है। चिराग पासवान की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वह इस विधेयक के समर्थन में नहीं हैं। भाजपा को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके पास साधारण बहुमत नहीं है, और वे अन्य दलों के समर्थन के बिना इसे पारित नहीं कर सकते।”
यह भी पढ़ें : वक्फ संशोधन विधेयक 2025: कानूनी बदलाव और चिंताएं, साथ में कुछ भ्रांतियां भी…
सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर कहा, “हर अच्छे काम का विरोध किया जाता है। इसी तरह वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हंगामा हो रहा है। जो लोग इस मुद्दे पर हंगामा कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं – क्या वक्फ बोर्ड ने कोई कल्याण किया है? सब कुछ छोड़िए, क्या वक्फ ने मुसलमानों का भी कोई भला किया है? वक्फ निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। यह किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बन गया है। सुधार समय की मांग है और हर सुधार का विरोध किया जाता है।”
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