वैशाली नाव हादसे में चांदनी ने बचाई दो बच्चों की जान, 15 साल की लड़की की हिम्मत को सलाम

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई. इस दुखद घटना के बीच 15 साल की चांदनी कुमारी ने बहादुरी दिखाते हुए दो बच्चों की जान बचाई. हादसे में बचे लोगों ने उस रात की दर्दनाक कहानी सुनाई.

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वैशाली नाव हादसे में दो बच्चों को बचाने वाली 15 साल की चांदनी कुमारी की बहादुरी की चर्चा हो रही है (Photo-AI Generated)

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में हुए नाव हादसे ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया. मंगलवार रात हुए इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोगों की जान बच गई. इस मुश्किल घड़ी में 15 साल की चांदनी कुमारी ने ऐसी हिम्मत दिखाई, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे. उसने खुद तैरकर अपनी जान बचाई और डूब रहे दो बच्चों को भी सुरक्षित बाहर निकाला.

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ट्यूशन के बाद भोज में जाने निकले थे बच्चे

यह घटना राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव की है. जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को कुछ बच्चे ट्यूशन पढ़ने के बाद घरवालों को बताए बिना एक भोज में शामिल होने चले गए. भोज तक पहुंचने के लिए उन्हें गंगा नदी के एक हिस्से को नाव से पार करना था. नाव पर कुल 19 लोग सवार थे. बताया जाता है कि नाव पुरानी और कमजोर थी. नदी के बीच पहुंचते ही उसमें पानी भरने लगा और देखते ही देखते नाव डूब गई. नाव पर सवार बच्चे मदद के लिए चिल्लाने लगे. आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे. कुछ लोगों ने पानी में उतरकर बच्चों को बचाने की कोशिश की. लेकिन रात का अंधेरा होने के कारण राहत और बचाव के काम में काफी परेशानी आई.

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चांदनी ने बचाई दो बच्चों की जान

नाव पर सवार 15 साल की चांदनी कुमारी ने हादसे के दौरान हिम्मत नहीं हारी. चांदनी के मुताबिक, वह किसी तरह तैरकर बाहर निकल आई. इसके बाद उसने डूब रहे कार्तिक और कुदुस नाम के दो बच्चों को भी बचाया. दोनों बच्चों को इलाज के लिए पटना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी हालत स्थिर बताई गई है. चांदनी चौथी कक्षा में पढ़ती है. इतनी कम उम्र में उसने जिस तरह अपनी जान बचाने के साथ दूसरे बच्चों की मदद की.

अंधेरे और कीचड़ के कारण बचाव में आई परेशानी

चांदनी ने बताया कि हादसे वाली जगह पर काफी अंधेरा था और रोशनी की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी. वहां कीचड़ भी था, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था. उसने बताया कि वह कुछ और बच्चों की मदद करना चाहती थी, लेकिन सांस फूलने लगी तो उसे खुद बाहर निकलना पड़ा. बाहर पहुंचने के बाद वह बेहोश होकर गिर गई.

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आंखों के सामने डूब गए भाई-बहन, रो पड़ी निशा

इस हादसे में बची एक अन्य लड़की निशा कुमारी ने भी उस रात की दर्दनाक कहानी बताई. उसने कहा कि ट्यूशन के बाद सभी बच्चे भोज में शामिल होने के लिए उत्साहित थे. नाविक ने बताया था कि भोज के लिए नाव की तीन बार आवाजाही हो चुकी है और यह आखिरी फेरा है. नाव आगे बढ़ी, लेकिन बीच नदी में अचानक डूबने लगी. बच्चों को कुछ समझ नहीं आया. सभी मदद के लिए चिल्लाने लगे, लेकिन पानी गहरा होने के कारण वे खुद को बचाने की कोशिश में जुट गए. निशा ने रोते हुए बताया कि उसकी आंखों के सामने उसके भाई-बहन समेत कई बच्चे डूब गए. वह इस हादसे में बच गई, लेकिन अपने परिवार के बच्चों को खोने का दर्द बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. उसकी बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए.

हादसे ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

वैशाली का यह नाव हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दुख बन गया है. वहीं, चांदनी की बहादुरी ने मुश्किल समय में हिम्मत और दूसरों की मदद करने की मिसाल पेश की है. इस घटना ने नाव की सुरक्षा, यात्रियों की संख्या और रात के समय नदी पार कराने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं. ऐसे हादसों को रोकने के लिए जरूरी है कि नावों की हालत, सुरक्षा नियमों और बचाव के इंतजामों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए.

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