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Bihar Elections: बिहार में BJP को झटका देंगी सोनिया, महागठबंधन की सीटों का ऐसे होगा बंटवारा

Sonia Gandhi Patna visit: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सोनिया गांधी का पटना दौरा महागठबंधन के दलों के लिए संजीवनी का काम कर सकता है. इससे जहां कांग्रेस और आरजेडी में उभरते मतभेदों को सुलझाने के आसार हैं, वहीं सीटों पर भी सहमति बनेगी.

Sonia Gandhi Patna visit: सोनिया गांधी को लेकर कांग्रेस महागठबंधन के नेताओं में बहुत सम्मान है. कांग्रेस अध्यक्ष न होने के बावजूद उनके हर सुझाव पर महागठबंधन के सहयोगी ध्यान देते हैं. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य होने के नाते सोनिया बुधवार को पटना में होंगी. पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में होने वाली सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी शामिल होंगी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में उतरने वाले पार्टी उम्मीदवारों को अंतिम रूप देंगी.

राजद और कांग्रेस के बीच 'कड़वाहट'

बिहार में इन दिनों राजद और कांग्रेस के बीच थोड़े मतभेद नजर आ रहे हैं. तेजस्वी यादव के नाम को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सार्वजनिक रूप से समर्थन देने से इनकार करने पर कांग्रेस थोड़ी नाराज़ थी, जबकि राजद ने राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा को सफल बनाने के लिए अपना पूरा सहयोग दिया था. इसी कड़वाहट के चलते पिछले हफ़्ते तेजस्वी अकेले ही अपनी यात्रा पर निकल पड़े और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं.

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महागठबंधन के सीटों के समीकरण को समझें

बिहार में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कम से कम 70 सीटों पर चुनाव लड़ने पर अड़ी थी, इतनी ही सीटों पर कांग्रेस ने 2020 में चुनाव लड़ा था. राजद भी 144 सीटों पर चुनाव लड़ने और बाकी 99 सीटें अपने सहयोगियों के लिए छोड़ने पर अड़ा था. वामपंथी और मुकेश साहनी के नेतृत्व वाली विकासशील इंसान पार्टी भी ज़्यादा सीटों के लिए अपनी ताकत दिखा रही थी, लेकिन यह अतीत की बात है.

कांग्रेस और राजद की सीटें घटाने में सहमति

सोनिया गांधी के कठिन समय में उनके साथ खड़े रहे लालू प्रसाद के कथित तौर पर विचार थे कि कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे को विवाद का विषय नहीं बनना चाहिए और इससे एनडीए को इंडिया ब्लॉक को हराने का मौका नहीं मिलना चाहिए. महागठबंधन के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, "हालांकि सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा अगले कुछ दिनों में कर दी जाएगी, लेकिन मोटे तौर पर यह तय हो चुका है कि कांग्रेस अपनी मांग 70 से घटाकर 58 कर देगी, जबकि राजद 144 से घटाकर 130 कर देगी."

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कांग्रेस का सुझाव और राजद की दरियादिली देखें

राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने ऐसी सीटें मांगी, जिसपर वो चुनाव जीत सकती हो. वहीं, राजद ने भी दरियादिली दिखाते हुए सीटों की संख्या कम कर दी है, जबकि भाकपा-माले की पिछली बार बेहतर स्ट्राइक रेट को देखते हुए उसकी सीटें 19 से बढ़ाकर 27 कर दी हैं." 2020 के चुनाव में, भाकपा-माले ने 19 सीटों में से 12 पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 19 पर जीत हासिल की थी. राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, हालांकि कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारण वह मुख्यमंत्री की कुर्सी से चूक गई थी."

इन्हें भी मिल सकती हैं सीटें

सूत्र ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस (रामविलास पासवान के भाई) के नेतृत्व वाली लोजपा जैसे नए प्रवेशकों के साथ, तेजस्वी महागठबंधन में नए खिलाड़ियों को दो-दो सीटें आवंटित कर सकते हैं, इसके अलावा सीपीआई को छह सीटें, सीपीएम को चार और वीआईपी को 14 सीटें दी जा सकती हैं.


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