दीपावली से पहले मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी कड़ी में गुरुवार को पटना के अनीसाबाद गोलंबर के पास स्थित शालीमार कोल्ड स्टोरेज में छापेमारी की गई. जांच के दौरान खाद्य पदार्थों के भंडारण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.
छापेमारी के दौरान कोल्ड स्टोरेज में रखी छेना की मिठाइयों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनमें कथित तौर पर फॉर्मेलिन के इस्तेमाल की आशंका जताई गई. इसके अलावा बड़ी मात्रा में ड्राई फ्रूट्स और चॉकलेट भी एक्सपायरी या खराब हालत में पाए गए. कुछ मिठाइयों पर वर्ष 2025 का लेबल लगा हुआ था, जबकि अंजीर और खजूर के डिब्बों पर मैन्युफैक्चरिंग डेट तक अंकित नहीं थी. जांच के दौरान एक और गंभीर लापरवाही सामने आई. कोल्ड स्टोरेज में ड्राई फ्रूट्स के साथ अंडे भी रखे गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, यहां खाद्य पदार्थों के रखरखाव और भंडारण के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था.
फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों को शालीमार कोल्ड स्टोरेज में अनियमितताओं की सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की. जांच के दौरान कुछ ऐसे स्टोरेज चैंबर भी मिले, जिनमें रखे खाद्य पदार्थ पूरी तरह खराब हो चुके थे. अधिकारियों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज मालिक कुछ चैंबर खोलने में सहयोग नहीं कर रहा है. ऐसे में संबंधित चैंबरों को सील कर आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर मौजूद रहकर खाद्य पदार्थों की जांच और नमूने लेने की कार्रवाई में जुटी है. इस छापेमारी के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और आम लोगों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल यह है कि दीपावली के मौके पर बाजार में बिकने वाली मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स की गुणवत्ता की निगरानी कितनी प्रभावी है और लोगों की थाली तक पहुंचने से पहले इनकी सुरक्षा सुनिश्चित कौन करेगा?