Bihar Disaster Compensation: बिहार में हर साल आंधी-तूफान, बाढ़, नाव दुर्घटना और वज्रपात (आकाशीय बिजली) जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं. इसके अलावा बड़े सड़क हादसों में भी भारी नुकसान होता है. ऐसी दुखद घड़ियों में पीड़ितों की मदद के लिए बिहार सरकार की एक बेहद महत्वपूर्ण नीति काम करती है. सरकार का स्पष्ट मानना है कि राज्य के खजाने पर सबसे पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है. आइए जानते हैं कि आपदा में मौत होने पर सरकार कितना मुआवजा देती है, इसके लिए कौन पात्र है और यह राशि कैसे मिलती है.
आपदा में मौत पर कितना मिलता है मुआवजा?
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आपदा प्रबंधन विभाग के नियमों के अनुसार, बाढ़, वज्रपात, नाव दुर्घटना, आंधी-तूफान, पेड़ गिरने या टिन शेड उड़ने जैसी अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों (परिवार) को 4 लाख रुपये की अनुग्रह अनुदान राशि (मुआवजा) दी जाती है. इसके साथ ही, सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब बड़े सामूहिक सड़क हादसों (जिसमें एक से अधिक लोगों की मौत हो) में भी मुआवजे का भुगतान परिवहन विभाग के बजाय आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत किया जाएगा. इसके तहत भी प्रत्येक मृतक के आश्रित को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है.
कौन होता है मुआवजे का हकदार?
- मृतक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए.
- मौत सरकार द्वारा अधिसूचित आपदा (जैसे वज्रपात, बाढ़, सामूहिक सड़क दुर्घटना आदि) के कारण होनी चाहिए.
- मुआवजा राशि मृतक के कानूनी आश्रित या उत्तराधिकारी (जैसे पति/पत्नी, माता-पिता या बच्चे) को ही दी जाती है.
कैसे मिलता है मुआवजा? (आवेदन की प्रक्रिया)
आपदा के समय पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए इसकी प्रक्रिया को काफी सरल रखा गया है:
- घटना की सूचना और एफआईआर: आपदा या हादसे के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और अंचल अधिकारी (CO) को सूचना दी जाती है. पुलिस मामले में एफआईआर या यूडी केस दर्ज करती है.
- पोस्टमार्टम और मृत्यु प्रमाण पत्र: मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाना अनिवार्य है, जिससे मौत की वजह (आपदा/हादसा) स्पष्ट हो सके. इसके बाद अस्पताल या स्थानीय प्रशासन से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होता है.
- सत्यापन : स्थानीय अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी घटना स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपते हैं.
- बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर: रिपोर्ट सही पाए जाने पर जिला आपदा प्रबंधन शाखा द्वारा स्वीकृत राशि सीधे मृतक के आश्रित के बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) भेज दी जाती है. इसके लिए आश्रित को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और वंशावली/उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र देना होता है.
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