'अर्थी रखी है और उसके साथ लड़कियां कर रही डांस', बिहार के इस नए ट्रेंड से सब हैरान 

Bai ji ka dance: नाचने वाली इन लड़कियों से कार्यक्रम करवाने वाले लहंगा चोली या छोटे कपड़े में आने की डिमांड करते हैं। पैसे देने के बहाने लड़कियों को गोद में बैठाते हैं।

प्रतिकात्मक फोटो, क्रेडिट गूगल (34)

प्रतिकात्मक फोटो, क्रेडिट गूगल

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Bihar Girls Dance: आपने शादी, जन्मदिन आदि खुशी के समारोह में नाच-गाने का प्रोग्रम जरूर देखा होगा। लेकिन बिहार में अब एक नया ट्रेंड चल रहा है, जहां लोग घर में किसी की मौत पर भी नाचने वाली लड़कियां बुला रहे हैं। 2 से 6 की संख्या में इन लड़कियों को रात में नाचने के लिए बुलाया जाता है।

रात करीब 9 बजे से सुबह 5 बजे तक इन लड़कियों को नचाया जाता है। एक लड़की को इस काम के पांच से छह हजार रुपये दिए जाते हैं। बता दें अब इन कार्यक्रमों में फायरिंग भी होने लगी है। हाल ही में नालंदा ज़िले में एक श्राद्ध कार्यक्रम था। इस दौरान नाच कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें फायिंग होने लगी और वहां मौजूद आशीर्वाद कुमार के सिर में गोली लगने से मौत हो गई।

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अर्थी पास रखी होती है और उसके साथ डांस भी होता रहता है

मीडिया में दिए बयान में ऐसी ही एक नाचने वाली लड़की ने कहा कि बिहार में अब मरनी (मृत्यु) पर भी लोग डांस करवाते हैं। अर्थी पास रखी होती है और उसके साथ डांस भी होता रहता है। जानकारी के अनुसार रात में 8 बजे बाद नाचना शुरू होता है। करीब 12 बजे तक बॉलीवुड गानों पर नाच होता है, फिर भोजपुरी के गाने बजने लगते हैं।

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शव यात्रा के साथ नाच का कार्यक्रम

नाचने वाली इन लड़कियों से कार्यक्रम करवाने वाले लहंगा चोली या छोटे कपड़े में आने की डिमांड करते हैं। पैसे देने के बहाने लड़कियों को गोद में बैठाते हैं और उनके साथ अश्लील हरकतें करते हैं। बिहार के भोजपुर, औरंगाबाद, बांका, रोहतास सहित कई इलाके में मौत का डांस करवाने का ये चलन लगातार बढ़ रहा है। बता दें लोक परंपराओं में मृत्यु के समय और उसके बाद होने वाले विधि-विधानों के दौरान गायन होता है। लेकिन इस दौरान डांस की कोई संस्कृति नहीं है।

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लेखक के बारे में

Amit Kasana

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.
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