बिहार में सड़क से सफर करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी परियोजना आने वाली है. पटना से पूर्णिया के बीच करीब 245 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे बनाया जाना है. इसके बनने से पटना से पूर्णिया जाने में लगने वाला समय कम होकर करीब 3 घंटे रह जाने की उम्मीद है. अभी इस सफर में रास्ते के हिसाब से 7 से साढ़े 8 घंटे तक लगते हैं. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 31,987 करोड़ रुपये बताई गई है. यह चार लेन की सड़क होगी. इसे भविष्य में छह लेन तक बढ़ाने की व्यवस्था भी रखी जाएगी.
हाजीपुर से पूर्णिया तक बनेगा एक्सप्रेस-वे
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे वैशाली जिले में हाजीपुर के पास एनएच-22 से शुरू होगा. इसके बाद यह कई इलाकों से होते हुए पूर्णिया जिले के हंसदाह में एनएच-27 से जुड़ेगा. इस मार्ग की कुल लंबाई करीब 245 किलोमीटर होगी. इस एक्सप्रेस-वे को पटना रिंग रोड से भी जोड़ने की योजना है. इससे पटना के साथ-साथ पूर्णिया और किशनगंज की ओर जाने वाले यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. केंद्र सरकार ने 29 जुलाई 2025 को इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग NE-9 के रूप में सरकारी रूप से घोषित किया था. इसे बिहार का पहला नेशनल एक्सप्रेस-वे बताया जा रहा है.
पटना से पूर्णिया का सफर होगा आसान
फिलहाल पटना से पूर्णिया जाने के लिए यात्रियों को अलग-अलग सड़क मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है. इन रास्तों से सफर में करीब 7 से साढ़े 8 घंटे लग सकते हैं. एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह समय घटकर करीब 3 घंटे होने का अनुमान है. इससे इलाज, पढ़ाई, कारोबार और सरकारी कामों के लिए पटना जाने वाले लोगों को राहत मिल सकती है. हालांकि, सफर में लगने वाला वास्तविक समय सड़क के पूरा होने, प्रवेश और निकास के स्थान, यातायात और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे बिहार के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने वाली बड़ी परियोजना हो सकती है. इससे खासकर कोसी और सीमांचल के इलाकों को बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है.
तीन हिस्सों में होगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण
एक्सप्रेस-वे का निर्माण तीन हिस्सों में करने की योजना है. पहला हिस्सा मीरनगर अरेजी से भिरहा तक करीब 84.5 किलोमीटर लंबा होगा. इस पर अनुमानित 10,083.96 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है. दूसरा हिस्सा भिरहा से सरौंजा तक करीब 51.8 किलोमीटर लंबा होगा. इसकी अनुमानित लागत 8,564.82 करोड़ रुपये है. तीसरा हिस्सा सरौंजा से हंसदाह तक करीब 108.6 किलोमीटर लंबा होगा. इस पर लगभग 13,338.32 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. दूसरे हिस्से में कोसी नदी पर करीब 7 किलोमीटर लंबा छह लेन का पुल बनाने की भी योजना है.
21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास बनाए जाएंगे
इस एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों की सुविधा के लिए कई तरह के निर्माण किए जाएंगे. परियोजना के मुताबिक, इसमें 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल, 11 रेलवे ओवरब्रिज, 21 इंटरचेंज और 322 अंडरपास शामिल हैं. मार्ग में 20 नदियों और जलधाराओं पर भी पुल बनाए जाने की योजना है. सड़क को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति से चल सकें. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर समय इतनी रफ्तार से गाड़ी चलाने की अनुमति होगी. असल गति सीमा संबंधित नियमों और सड़क पर लगे संकेतों के अनुसार होगी.
छह जिलों में जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा
इस परियोजना के लिए बिहार के छह जिलों के 29 इलाकों में जमीन की जरूरत बताई गई है. इनमें वैशाली, समस्तीपुर, सहरसा, पूर्णिया, दरभंगा और मधेपुरा शामिल हैं. परियोजना के लिए कुल 2,236 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की जरूरत बताई गई है. इसमें निजी जमीन के साथ सरकारी और वन भूमि भी शामिल है. जमीन इलाकों की प्रक्रिया राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत की जा रही है. जमीन के मालिकों को नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा.
कई शहरों को मिलेगा एक्सप्रेसवे का फायदा
इस एक्सप्रेस-वे से हाजीपुर, राजापाकर, जंदाहा, मोरवा, सरायरंजन, उजियारपुर, रोसड़ा, कुशेश्वरस्थान, सिमरी बख्तियारपुर, सौर बाजार, बिहारीगंज, धमदाहा और पूर्णिया समेत कई शहरों और कस्बों को फायदा मिलने की उम्मीद है. समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा के जिला मुख्यालयों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए अलग संपर्क मार्ग बनाने की भी योजना है. इससे इन इलाकों के लोगों को एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने में आसानी हो सकती है.
किसानों और व्यापारियों को भी होगा फायदा
बेहतर सड़क से किसानों को अपनी फसल बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. तेज और आसान परिवहन से कृषि उत्पादों को ले जाने में लगने वाला समय कम हो सकता है. इससे कृषि आधारित कारोबार और खाद्य तैयार करने और पैकेजिंग से जुड़े कामों को बढ़ावा मिलने की संभावना है. व्यापारियों और उद्योग लगाने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह सड़क उपयोगी हो सकती है. सामान लाने-ले जाने और दूसरे शहरों तक पहुंचने में आसानी होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.