जनता मेहरबान या बदलाव की आंधी…, बिहार में रिकॉर्ड वोटिंग के क्या हैं मायने? पहले चरण के बाद मिल रहे ऐसे संकेत

Bihar Assembly Election: राजनीतिक गलियारों में पहले चरण की बंपर वोटिंग के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ऐसे सवाल उठने लगे हैं कि क्या जनता इस बार बदलाव चाहती है, या नीतीश सरकार को एक बार फिर से समर्थन मिलने वाला है?

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Bihar Assembly Election: बिहार में गुरुवार को विधानसभा चुनाव को लेकर हुए पहले चरण की वोटिंग में 18 जिलों की जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. पहले चरण में रिकॉर्ड 64.69 फीसदी मतदान हुआ, जो पिछले विधानसभा चुनाव 2020 से भी 8 प्रतिशत अधिक है. उस समम पहले चरण में 56.1% ही मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. बिहार के इतिहास में यह पहली बार है, जब विधसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में इतनी बंपर वोटिंग हुई है, 6 नवंबर को 121 सीटों पर हुए मतदान में 2.42 करोड़ वोटर्स ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो पछली बार के चुनाव से भी 36 लाख अधिक है. इस बार के चुनाव में बिहार की जनता का उत्साह देखते ही बनता है.

जनता मेहरबान या बदलाव की आंधी?


उधर, राजनीतिक गलियारों में पहले चरण की बंपर वोटिंग के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ऐसे सवाल उठने लगे हैं कि क्या जनता इस बार बदलाव चाहती है, या नीतीश सरकार को एक बार फिर से समर्थन मिलने वाला है? भारत के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो जब-जब जनता भारी संख्या में घरों से निकलर पोलिंग बूथ पहुंची है तो बदलाव के मूड से ही अपना वोट डाला है, हालांकि ऐसा हर बार नहीं होता. कई बार तो भारी मतदान के बाद भी वर्तमान सरकार को जनता ने अपना समर्थन दिया और सरकार को वापसी दिलाई. तो अभी ये स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है कि बिहार में जनता किस मूड से अपना वोट डाल रही है, इसका जवाब तो 14 नवंबर को चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा.

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चुनावी इतिहास से मिल रहे ऐसे संकेत


हालांकि, अगर अन्य राज्यों को कुछ पुराने मतदान आंकड़ों पर नजर डालें तो आने दिलचस्प आंकड़े देखने को मिलते हैं. इन आंकड़ों में साफ देखा जा सकता है कि कई ऐसे राज्य हैं, जहां पिछली बार से ज्यादा वोटिंग हुई और सरकार ने वापसी की.

  1. मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2023 में 77 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो पिछले चुनाव से भी 2.08 फीसदी ज्यादा थी. चुनाव नजीतों में बीजेपी को बहुमत मिला और सरकार की वापसी हुई.
  2. साल 2014 को ओडिशा विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही कुछ हुआ था. पिछली बार से 8.35 प्रतिशत अधिक वोटिंग के साथ ओडिशा में 73.65 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. नतीजे भी सत्ताधारी पार्टी बीजेडी के पक्ष में आए और सरकार ने वापसी की.
  3. गुजरात में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला जब, 2012 के विधानसभा चुनाव में 11.53 फीसदी अधिक मतदान हुए, लेकिन इसके बाद भी प्रदेश में बीजेपी सरकार ने वापसी की. तब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात से मुख्यमंत्री थे.
  4. बिहार के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो विधानसभा चुनाव 2010 में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था. उस समय भी पिछली बार के चुनाव से 6.82 प्रतिशत अधिक वोट पड़े थे और चुनाव नतीजे सामने आने के बाद JDU गठबंधन सरकार ने वापसी की.

वहीं, कई बार ऐसे भी संकेत देखने को मिले जब प्रदेश की जनता ने बंपर संख्या में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया.

दो साल पहले ही हुए राजस्थान के विधानसभा चुनाव में 0.39 फीसदी अधिक वोटर्स के साथ कुल 74.45 मदताओं ने वोट डाला और सत्ता परिवर्तन कर तत्कालीन कांग्रेस सरकार को बाहर का रास्ता दिखा दिया.

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ऐसा ही नतीजा तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2011 में देखने को मिला जब 7.19 फीसदी अधिक मतदान के बाद भी तत्कालीन DMK गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा और AIADMK गठबंधन ने सरकार बनाई.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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