Anant Singh: बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. पूर्व सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से टकराव के बाद उन्हें और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. इस कार्रवाई ने ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर इस बाहुबली नेता के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब उनके सामने नई पार्टी बनाने, किसी दूसरे दल के साथ जाने या अपनी विधानसभा सदस्यता बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने जैसे विकल्प हैं. JDU ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की है. पार्टी ने इसके लिए संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून का हवाला दिया है.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
ये ताजा विवाद बिहार विधान परिषद के चुनाव के दौरान सामने आया. JDU ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि अनंत सिंह ने पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया. अनंत सिंह का आरोप था कि नीरज कुमार ने पिछले चुनावों में उनके खिलाफ काम किया था. वहीं जेडीयू ने उनके इस कदम को पार्टी विरोधी गतिविधि और अनुशासनहीनता माना. इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को दोनों को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया.
नई पार्टी बनाएंगे अनंत सिंह?
जेडीयू से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह के सामने एक विकल्प अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने का है. उन्होंने इस संभावना के संकेत दिए हैं. हालांकि, नई पार्टी बनाना और उसे राजनीतिक रूप से मजबूत करना आसान नहीं होगा. इसके लिए संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और अपने प्रभाव वाले क्षेत्र से बाहर जनाधार बढ़ाने की जरूरत होगी.
निर्दलीय चुनाव या किसी दूसरे दल से गठबंधन?
अनंत सिंह का राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों और निर्दलीय राजनीति से जुड़ा रहा है. मोकामा में उनके निजी जनाधार को उनकी बड़ी ताकत माना जाता है. ऐसे में वो भविष्य में निर्दलीय चुनाव लड़ने का रास्ता भी चुन सकते हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल या प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के साथ राजनीतिक तालमेल की संभावना भी चर्चा में रह सकती है. विधान परिषद चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार का समर्थन करने के कारण इस विकल्प पर नजरें टिकी हैं. हालांकि किसी गठबंधन को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है
क्या खतरे में पड़ सकती है विधायकी?
जनता दल यूनाइटेड ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की है. लेकिन सिर्फ पार्टी से निष्कासित होने के कारण किसी विधायक की सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं होती. दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता का फैसला कई तरह के तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर निर्भर करेगा. अगर उनके खिलाफ अयोग्यता का आदेश आता है, तो अनंत सिंह उसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं.
क्या नीतीश कुमार कराएंगे सुलह?
अनंत सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार के साथ उनके निजी रिश्ते अब भी अच्छे हैं. हालांकि जनता दल यूनाइटेड की सख्त कार्रवाई के बाद राजनीतिक सुलह की राह आसान नहीं दिखती. अब ये देखना अहम होगा कि ‘छोटे सरकार’ अपनी राजनीतिक ताकत बनाए रखने के लिए कौन-सा रास्ता चुनते हैं. अब इस पूरे मामले में नीतीश की प्रतिक्रिया का इंतजार है.