बांग्लादेश के युवा बल्लेबाज तौहीद हृदोय ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में अपनी बल्लेबाजी से इतिहास रच दिया. उन्होंने मुश्किल हालात में नाबाद 242 रनों की शानदार पारी खेलकर बांग्लादेश के लिए टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इस दौरान उन्होंने अनुभवी बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम को पीछे छोड़ दिया. हृदोय की यह पारी इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्होंने उस समय टीम को संभाला, जब बांग्लादेश के विकेट लगातार गिर रहे थे.
मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 356 रन बनाए थे. जवाब में उतरी बांग्लादेश की शुरुआत बेहद खराब रही. टीम ने महज 22 रन के स्कोर पर अपने दो अहम विकेट गंवा दिए. इसके बाद हृदोय ने एक छोर संभालते हुए धैर्य के साथ बल्लेबाजी की और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने की कोशिश की.
मुशफिकुर रहीम का सालों पुराना रिकॉर्ड टूटा
तौहीद हृदोय ने अपनी नाबाद 242 रनों की पारी के साथ बांग्लादेशी क्रिकेट में नया कीर्तिमान स्थापित किया. इससे पहले टेस्ट में देश के लिए सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने का रिकॉर्ड मुशफिकुर रहीम के नाम था. उन्होंने साल 2018 में जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 219 रन बनाए थे. अब हृदोय ने उनसे आगे निकलकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है.
अपनी ऐतिहासिक पारी के दौरान हृदोय ने 359 गेंदों का सामना किया. उन्होंने इस दौरान 22 चौके और 11 छक्के लगाए. उनकी बल्लेबाजी में धैर्य के साथ आक्रामकता का भी शानदार मेल देखने को मिला.
पहले संभलकर की बल्लेबाजी, बाद में दिखाए बड़े शॉट
हृदोय ने क्रीज पर आने के बाद जल्दबाजी नहीं दिखाई. उन्होंने शुरुआत में अपना विकेट बचाने पर ध्यान दिया और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों का डटकर सामना किया. उन्हें पारी का पहला चौका लगाने के लिए 33वें ओवर तक इंतजार करना पड़ा. इस बीच नजमुल हुसैन शांतो भी आउट हो गए और बांग्लादेश का स्कोर 51 रन पर तीन विकेट हो गया.
इसके बाद हृदोय को मुशफिकुर रहीम का साथ मिला. दोनों बल्लेबाजों ने संभलकर खेलते हुए 73 रनों की साझेदारी की. इसी दौरान हृदोय ने जोशुआ बिशप की गेंद पर अपना पहला टेस्ट अर्धशतक पूरा किया.
हालांकि, मध्यक्रम के बल्लेबाज इस शुरुआत को आगे नहीं बढ़ा सके और 184 रन तक पहुंचते-पहुंचते बांग्लादेश के सात विकेट गिर गए. ऐसे मुश्किल समय में हृदोय ने निचले क्रम के खिलाड़ियों के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया. उन्होंने परिस्थितियों को समझते हुए अपनी बल्लेबाजी का तरीका बदला और रन बनाने की गति तेज कर दी. आखिरकार उनकी नाबाद 242 रनों की पारी बांग्लादेश के टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी बन गई.