'विराट कोहली ने अपनी कमजोरी को सुधारने की जगह टेस्ट को अलविदा कहना चुना', वनडे को तरजीह देने पर निराश हैं ये भारतीय दिग्गज

Virat Kohli’s Test Retirement: विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास लेना क्रिकेट फैंस के अलावा जेंटलमैन गेम के एक्सपर्ट को भी काफी निराश करता है. टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने किंग कोहली के सबसे लंबे फॉर्मेट को अलविदा करने पर अफसोस जाहिर किया है. उनका कहना है कि वो अपनी दिक्कतों को ठीक कर सकते थे.

Virat Kohli Test Retirement 2

Sanjay Manjrekar On Virat Kohli’s Test Retirement: संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने और वनडे खेलने जारी रखने के फैसले पर अपनी निराशा जताई है. उन्होंने कहा है कि ये जानकर उन्हें दुख होता है कि जबकि जो रूट और स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी अपनी टीमों के लिए लगातार रन बटोर रहे हैं, भारत के सबसे महान रेड-बॉल कप्तान ने अपनी परेशानी पर काम करने की बजाय ‘अलविदा’ कहने का फैसला लिया.

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निराशाजनक रिटायरमेंट

विराट कोहली ने साल 2025 में ऑस्ट्रेलिया में एक नाकाम टेस्ट सीरीज के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जहां उन्होंने 10 पारियों में सिर्फ 194 रन बनाए, जिनमें से 100 रन पर्थ टेस्ट की एक पारी में आए. ये फैसला सभी के लिए चौंकाने वाला था, ये देखते हुए कि उन्हें इस फॉर्मेट से कितनी मोहब्बत थी.

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10 हजार रन से चूके

‘फैब फोर’ में होने के बावजूद, विराट कोहली, जो टेस्ट क्रिकेट का जिंदा मिसाल हैं, उन्होंने 123 मैचों में 9230 रन बनाकर 46.85 की औसत के साथ संन्यास लिया. ये फैक्ट कि कोहली अपने करियर की शुरुआत में टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन पूरे करने को अपने सबसे बड़े टारगेट्स में से एक मानते थे, लेकिन वो इसे पूरा नहीं कर पाए, सबसे ज्यादा कचोटता है. हालांकि, कोहली अभी भी वनडे में रन बनाने की झड़ी लगाते रहते हैं, लेकिन मंजरेकर 50 ओवर के क्रिकेट को टेस्ट से ज्यादा प्रायोरिटी देने के फेवर में नहीं हैं.

‘विराट ने कदम पीछे हटा लिए’

संजय मांजरेकर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर कहा, ‘खैर, जैसे-जैसे जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, मेरा ध्यान विराट कोहली की तरफ चला जाता है. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से कदम पीछे हटा लिया है, और ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन 5 सालों में जब उन्होंने संघर्ष किया, उन्होंने इस बात को जानने में अपना दिल और आत्मा पूरी तरह से नहीं लगाई कि क्यों उनका एवरेज टेस्ट में 5 सालों तक 31 रहा. ये बात बाद के वक्त की है कि वो क्या कर सकते थे. लेकिन मैं बस ये देखकर दुखी हूं कि जो रूट, स्टीव स्मिथ, केन विलियमसन जैसे लोग सचमुच में टेस्ट क्रिकेट में खुद के लिए नाम बना रहे हैं.’

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‘वनडे को प्रायोरिटी देना निराशाजनक’

मांजरेकर ने कहा, ‘ये ठीक होता कि विराट कोहली बस क्रिकेट से दूर चले जाते, सभी क्रिकेट से रिटायर हो जाते. लेकिन ये कि उन्होंने वनडे क्रिकेट खेलना चुना है, सचमुच में मुझे उससे ज्यादा निराश करता है, क्योंकि ये एक ऐसा फॉर्मेट है जो टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज के लिए, जैसा मैंने पहले भी कहा है, सबसे आसान फॉर्मेट है.’

कोहली की संघर्ष

2020 और 2025 के बीच, टेस्ट क्रिकेट में कोहली की मुश्किलें अब कोई सीक्रेट नहीं है. कोविड-19 महामारी से पहले सभी फॉर्मैट में औसतन 50 रन बनाने वाले कोहली का एवरेज काफी गिर गया, क्योंकि हम तकरीबन 3 साल तक एक भी शतक देखे बिना गुजार चुके थे. लेकिन इस फैक्ट ने मांजरेकर को सबसे ज्यादा चुभाया कि कोहली ने कभी अपनी कमजोरी पर काम नहीं किया, यानी ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों के खिलाफ, जिन पर वो बार-बार आउट होते रहे. उनकी आखिरी सीरीज डाउन अंडर में सभी 9 आउट उसी कारण से हुए.

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रूट की तारीफ

एक वक्त में फैब फोर के लीडर रहे कोहली बाद में फिसल गए और उन्हें वापस जमीन हासिल करने का मौका नहीं मिला, जबकि रूट, स्मिथ और विलियमसन रिकॉर्ड तोड़ने वाले इनिंग्स और शतकों के साथ खेल को अपने मुताबिक चलाते रहे. इसे ध्यान में रखें: रूट ने हाल ही में अपना 41वां टेस्ट शतक बनाया और वो इतिहास में सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड के करीब हैं. स्मिथ लगातार मौजूदा ऐशेज में हार्ड वर्क कर रहे हैं. कोहली, इस बीच, ‘पूर्व टेस्ट खिलाड़ी’ की उपाधि लिए हुए हैं.

वनडे में जबरदस्त वापसी

हां, कोहली अपने सबसे अच्छे फॉर्मेट वनडे में वापसी कर चुके हैं, हाल ही में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 3 मैचों में 302 रन बनाए और उससे पहले ऑस्ट्रेलिया में नाबाद 74 रन की पारी खेली. लेकिन ये टेस्ट क्रिकेट के रोमांच के बराबर नहीं है और न ही उस विरासत की तुलना कर सकता है जो कोहली ने व्हाइट्स में अपने लिए बनाई थी.

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‘वापसी की कोशिश क्यों नहीं की?’

मांजरेकर ने कहा, ‘सचमुच में जो फॉर्मेट तुम्हें सही में परखता है वो है टेस्ट क्रिकेट, और टी20 क्रिकेट की अपनी अलग चुनौतियां हैं. दूसरी बात ये है कि क्योंकि वो इतने फिट हैं, बेहतरीन फिट हैं, आप और भी ज्यादा महसूस करते हैं कि शायद उन्होंने अपनी वापसी की कोशिश जारी रखी होती, आप जानते हैं, अपनी फॉर्म में लौटने के लिए, भले ही उन्हें किसी सीरीज से बाहर रखा गया हो, वो शायद फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उतर सकते थे, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड में खेल सकते थे, भारत में ज्यादा मैच खेल सकते थे, और एक और वापसी की कोशिश कर सकते थे.’

मांजरेकर का दुख

मांजरेकर ने आखिर में कहा, ‘ये मुझे सच में खुश कर सकता था. जाहिर है, ये उसका फैसला है, उसकी पसंद है. लेकिन हां, जब जो रूट सैकड़ों रन बनाते हैं या स्टीव स्मिथ, केन विलियमसन, मेरा ध्यान विराट कोहली की तरफ चला जाता है, थोड़ी निराशा और थोड़ा दुख महसूस होता है, क्योंकि वो टेस्ट क्रिकेट के लिए बहुत परवाह करते थे, नहीं किया?’

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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