न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज संजू सैमसन के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. सीरीज की शुरुआत में 67 रनों की शानदार पारी खेलने वाले संजू इसके बाद लगातार बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे. उन्होंने अगले चार मुकाबलों में 14, 18, 4 और 4 रन बनाए. उनके इस प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या अब युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के लिए संजू सैमसन को टीम से बाहर किया जाना चाहिए.
दूसरी तरफ, वैभव सूर्यवंशी ने इस सीरीज के दो मुकाबलों में हिस्सा लिया. उन्होंने एक मैच में 4 और दूसरे में 45 रन बनाए. हालांकि, खराब फॉर्म के बावजूद संजू को टीम मैनेजमेंट और पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन का समर्थन मिला है. अश्विन का मानना है कि 15 साल के वैभव पर अभी प्रदर्शन का दबाव डालने के बजाय उन्हें अपने खेल का आनंद लेने देना चाहिए. वहीं, हेड कोच गौतम गंभीर भी सीनियर खिलाड़ियों को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए पर्याप्त मौके देने के पक्ष में नजर आए हैं.
संजू के समर्थन में आए अश्विन, ट्रोल करने वाले को दिया जवाब
रविवार को पांचवें टी20 मुकाबले में संजू सैमसन के सिर्फ 4 रन बनाकर आउट होने के बाद सोशल मीडिया पर एक यूजर ने रविचंद्रन अश्विन को निशाने पर लिया. उसने संजू के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए अश्विन को टैग किया और लिखा, ‘हेलो अश्विन, आपकी पहली पसंद संजू पूरी सीरीज में फ्लॉप रही.’
इस टिप्पणी पर अश्विन ने भी मजेदार अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने लिखा, ‘संजू मेरी पहली पसंद है, तुम्हारा फुल टाइम जुनून है.’ अश्विन के इस जवाब को संजू के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. उन्होंने साफ कर दिया कि किसी खिलाड़ी की लगातार खराब पारियों के आधार पर उसके प्रति अपनी पसंद या समर्थन बदलना जरूरी नहीं है.
गौतम गंभीर ने भी संजू का किया बचाव
संजू सैमसन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच हेड कोच गौतम गंभीर ने भी अपनी बात रखी. पांचवें टी20 मुकाबले से पहले ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका मकसद सभी लोगों को खुश करना नहीं, बल्कि टीम के हित में सही फैसले लेना है. गंभीर के मुताबिक, लोकप्रिय फैसले लेना आसान होता है, लेकिन कोच की जिम्मेदारी ऐसे निर्णय लेने की है जो टीम के लिए जरूरी हों.
उन्होंने यह भी बताया कि ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के बीच भरोसा और सुरक्षा का माहौल बनाए रखना बेहद अहम है. इसके लिए उन खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना जरूरी है, जो लगातार टीम का हिस्सा रहे हैं. गंभीर का मानना है कि केवल लोकप्रियता या बाहरी आलोचना के आधार पर टीम में बदलाव नहीं किए जाने चाहिए.