Aakash Chopra Narrates Spot Fixing Story in Cricket: मैच फिक्सिंग ने 'जेंटलमैन गेम' को काफी बदनाम किया है, जिसको लेकर आईसीसी और तमाम क्रिकेट बोर्ड्स को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. इसी को लेकर भारत के पूर्व टेस्ट ओपनर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक दिलचस्प वीडियो शेयर किया है. ये वाक्या 2010 के पाकिस्तान क्रिकेट के फिक्सिंग स्कैंडल का है जिसे 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड अखबार' के एक अंडरकवर जर्नलिस्ट के नजरिए को बयां करता है.
झूठ के बीच सच की तलाश
वीडियो की शुरुआत में बताया गया है कि अंडरकवर जर्नलिस्ट बनना सिर्फ एक्साइटमेंट, थ्रिल और और ग्लैमर महसूस करना नहीं, बल्कि झूठ के बीच सच की तलाश करना है. कभी-कभी ये सच किसी की जिंदगी बर्बाद भी कर देता है. पत्रकार ने साल 2010 में पाकिस्तान के इंग्लैंड टूर के दौरान स्पॉट फिक्सिंग का ऐसा पर्दाफाश किया, जिससे पूरे क्रिकेट वर्ल्ड में तूफान आ गया.
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रिपोर्टर को मिली फिक्सिंग की लीड
वीडियो में बताया गया है कि न्यूज एडिटर ने जर्नलिस्ट को पाकिस्तान क्रिकेट टीम के इर्द गिर्द फिक्सिंग की लीड दी, जिसमें एजेंट मजहर माजिद का नाम सामने आया. बताया गया कि इसमें पाक टीम का कोई बड़ा खिलाड़ी शामिल है. इस बात को सुनकर रिपोर्टर को कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि ऐसा किस्सा वो पहले भी सुन चुके थे.
मजहर माजिद से मुलाकात
मजहर माजिद लंदन का एक एजेंट था जिसकी अंडरकवर रिपोर्टर से मुलाकात एक पॉश रेस्टोरेंट में हुई, जहां मजहर ने दावा किया कि वो 3 खिलाड़ियों को कंट्रोल करता है और बस कैश दिखाने की जरूरत है. एडिटर ने पहले ही जर्नलिस्ट को समझा दिया था 'फॉलो द मनी, कैच द लायन'. मजहर ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ उनसे बात की. उसके हर लफ्ज के साथ उनके अंदर का रिपोर्टर जाग रहा था, और अंदर का इंसान मर रहा था.
मजहर माजिद (फाइल फोटो)
खिलाड़ियों के नाम आया सामने
अगली मीटिंग मजहर के घर पर हुई, जिसमें मजहर ने सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर का नाम लिया और बताया कि वो कब 'नो बॉल' फेंकेंगे. ये सुनकर रिपोर्टर हैरान रह गए, लेकिन उन्होंने चेहरे पर एक्सप्रेशन नहीं लाए. मजहर के आसपास कैश का बंडल था, वो ऐसे बिहेव कर रहा था, जैसे कि ये उसके लिए रोज का काम है. रिपोर्टर के कपड़े में मौजूद हिडन कैमरा सब कुछ रिकॉर्ड कर रहा था और सारा सच खुद उनके पास जमा हो रहा था.
लॉर्ड्स टेस्ट में मिला सबूत
मजहर ने रिपोर्टर को कॉल करके बताया कि अगले दिन पहले ही ओवर में आमिर नो बॉल फेंकेगा. उसका टोन ऐसा था जैसे कि वो कोई पिज्जा ऑर्डर कर रहा है. लॉर्ड्स के प्रेस बॉक्स में बैठकर अंडरकवर जर्नलिस्ट ने देखा कि आमिर ने ठीक उसी वक्त एक 'मॉन्स्टर नो बॉल' फेंकी, जैसा तय हुआ था. इसके बाद आसिफ ने भी वही किया. स्टॉपवॉच और रिकॉर्डिंग के जरिए सारे सबूत (टाइम स्टैम्प और कैश एक्सचेंज) पत्रकार के पास पुख्ता हो गए.
बर्बाद होने वाला था 3 क्रिकेटर्स का करियर
उधर इंग्लैंड के फैंस अपनी टीम को अच्छा परफॉर्म करते हुए जश्न मना रहे थे, कमेंटेटर भी नो बॉल देखकर हैरान हो रहे थे, इधर रिपोर्टर के मन में अलग तरह का तूफान मचा हुआ था, क्योंकि उन्हें पता था कि उनकी तरफ से किया जाने वाला ये एक्सपोज तीनों आरोपी पाकिस्तानी क्रिकेटर्स मोहम्मद आमिर, मोहम्मद आसिफ और सलमान बट्ट के करियर को बर्बाद कर देगा.
स्पॉट फिक्सिंग हुई एक्सपोज
अगले दिन अखबार में स्पॉट फिक्सिंग की खबर छपी. जहां न्यूज रूम में जश्न था, वहीं अंडरकवर रिपोर्टर उदास था क्योंकि इस एक्सपोज ने 3 खिलाड़ियों का करियर और क्रिकेट का दिल तोड़ दिया था. स्कॉटलैंड यार्ड की जांच के बाद मोहम्मद आमिर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. साउथवार्क क्राउन कोर्ट में वो एक टूटे हुए इंसान नजर आए. कोर्ट के बाहर फैंस 'गद्दार' जैसे नारे लगा रहे थे.
'जख्म छोड़ गई ये स्टोरी'
अंडरकवर जर्नलिस्ट आखिर में कहता है कि हालांकि उसे हीरो माना गया, लेकिन उस दिन उसने न सिर्फ करप्शन को एक्सपोज किया, बल्कि एक खेल की आत्मा को भी मरते देखा. पत्रकार ने कहा, लोगों को लगता है कि हम जर्नलिस्ट कहानियों को भुला देते हैं, लेकिन ये बात सही नहीं है, क्योंकि कुछ कहानियां हमारे अंदर कभी न खत्म होने वाले जख्म दे जाती हैं.